एक या दो बेटियों वाली गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किल, अल्ट्रासाउंड पर रहेगी नजर
देहरादून। एक या दो बेटियों वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए देहरादून में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्यूंकि प्रशासन ने ऐसे लोगों के अल्ट्रासाउंड कराने पर नजर रखने को कहा है, जिनकी पहले से बेटियां हैं और वह फिर प्रेगनेंट हैं। हालांकि, यह यह आदेश अल्ट्रासाउंड का दुरुपयोग रोकने के लिए दिए गए हैं।
जिलाधिकारी डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गुरुवार को गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक जिला सलाहकार समिति की बैठक हुई। उन्होंने समिति के सदस्यों को निर्देश दिए कि जनपद में चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों और क्लीनिकों पर बारीकी से नजर रखें। इनके दुरुपयोग की गोपनीय जानकारी मिलने पर चैक करें कि केंद्र पर अल्ट्रासाउंड का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है या क्लीनिक व अल्ट्रासाउंड अवैध रूप से तो नहीं चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि समिति से जुड़े प्रत्येक डाक्टर कम से कम 10 ऐसे लोगों पर नजर रखें, जिनके पास एक बेटी है और दूसरी संतान की तैयारी कर रहे हैं या जिनके पास पहले से ही 2 बेटियां हैं, उन पर प्रेगनेंसी की स्थिति में लगातार नजर रखें। साथ ही पूछताछ करते रहें ताकि कोई अल्ट्रासाउंड तकनीक का दुरुपयोग न कर सके। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी/नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी डॉ बीसी रमोला, संयुक्त निदेशक विधि जीसी पंचोली, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ एनएस खत्री, डॉ वंदना सेमवाल, जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध) जेपी रतूड़ी, जिला समन्वय पीसीपीएनडीटी ममता बहुगुणा, डॉ चित्रा जोशी, सीडीपीओ शहर क्षमा बहुगुणा, सामाजिक कार्यकत्री कमला जायसवाल आदि मौजूद रहे।
अल्ट्रासाउंड का सालभर का आंकड़ा होगा इकट्ठा
देहरादून जनपद में एक वर्ष में क्लीनिक व अस्पतालों में प्रेगनेंसी के कितने अल्ट्रासाउंड हुए इसकी जानकारी जुटाने के लिए जिलाधिकारी ने कहा है। साथ ही एक साल में कितनी डिलीवरी हुई, कितने मामलों में किस कारण मिसकैरेज हुए और कितने मामले विधिक से संबंधित पाये गये, इन सबकी जानकारी अगली बैठक में देने को कहा गया है।
