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आइए जानें… व्रत-उपवास जितने धार्मिक उतने ही वैज्ञानिक भी..

निकी पुष्कर
कवि/साहित्यकार
देहरादून, उत्तराखंड
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व्रत या उपवास का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व है। ये उपवास साप्ताहिक, पाक्षिक, छमाही और वार्षिक भी होते हैं। कुछ व्रत सप्ताह मे एक दिन के लिए रखे जाते हैं यानी सप्ताह के किसी भी एक दिन। इन व्रत का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही वैज्ञानिक कारण भी है।


माना जाता है कि यदि सप्ताह में एक दिन उपवास रखा जाये तो व्यक्ति कई व्याधियों से दूर रहता है। इन व्रत को कदाचित् आस्था से इसलिए जोड़ दिया ताकि सामान्य जन इनको अनिवार्यता से अपना लें, जैसे, सोमवार को भगवान शिव का व्रत, मंगलवार को हनुमान जी का व्रत, बुधवार को गणेश जी का व्रत, गुरुवार को भगवान विष्णु, शुक्रवार को माता दुर्गा और शनिवार को शनिदेव के नाम का व्रत रखा जाता है। पन्द्रह-पन्द्रह दिनों के दो पक्ष होते हैं, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। इन दोनों पक्ष में एकादशी, त्रयोदशी, अमावस्या और पूर्णिमा के दिनों में भी व्रत रखे जाते हैं, ये हुए हमारे पाक्षिक व्रत।

नवरात्र और श्रावण के उपवास

छह मासिक व्रतों में नवरात्रि के व्रत आते हैं। पहली चैत्र माह की नवरात्रि और दूसरी अश्विन माह की। इन दोनों के मध्य छह महीने का अन्तर होता है।अब आते हैं वार्षिक व्रत। वार्षिक व्रतों में पूरे श्रावण मास में व्रत का विधान है।

आस्था के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी

व्रत या उपवास का संबंध हमारी आस्था से तो है ही, साथ ही इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। व्रत रखने से हमारी पाचन क्रिया ठीक से काम करती है। कहते हैं कि व्रत करने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है, जो धमनियों के लिए बेहद फायदेमंद है।व्रत से तनाव दूर होता है, रक्त की शुद्धि होती है, आँतों की सफाई हो जाती है और पेट को भी आराम मिलता है।

मौसम परिवर्तन से न बिगड़े स्वास्थ्य

इसके अतिरिक्त जो व्रत छह माह के अन्तर पर आते हैं..जैसे नवरात्र के व्रत। इन व्रत के पीछे एक कारण यह भी था कि यह समय ऋतु-परिवर्तन का समय होता है। मौसम मे अचानक परिवर्तन होने लगता है। इस कारण कई बार स्वास्थ्य भी बिगड़ जाता है। ऐसे समय मे यदि भोजन को सन्तुलित कर दिया जाये तो काफी हद तक स्वास्थ्य बिगड़ने से बचा जा सकता है। इसलिए भी इन उपवासों (विशेषकर नवरात्र) का समय निश्चित किया गया। श्रावण मास में पूरे महीना व्रत के लिए कहा जाता है। इस समय भी वृष्टि के कारण नाना प्रकार के रोग शरीर को लगने की आशंका होती है, इसलिए इस समय भी व्रत का प्रावधान किया गया है। इनको आस्था से इसलिए जोड़ दिया गया ताकि सभी सहजता से इसे अपना लें और मन से करें। इस तरह व्रत या उपवास हमारे जीवन में बहुत महत्व रखते हैं।

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