कवि/साहित्यकार वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” की केदारनाथ आपदा के तत्काल बाद सत्ता के निकम्मेपन पर रचित रचना…ऐसे राजा को धिक्कार..
वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखंड में सत्ता के निकम्मेपन से व्यथित होकर रचित वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” की रचना। आज केदारनाथ आपदा की आठवीं वर्षगांठ पर “शब्द रथ” के पाठकों के लिए प्रस्तुत…

वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ”
देहरादून, उत्तराखंड
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ऐसे राजा को धिक्कार
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विपदा की है घड़ी कुछ को मौत ले उड़ी
कुछ सहमे बैठे हैं गिरि पर सामने मौत खड़ी
जीवन मृत्यु के बीच हजारों झूल रहे हैं
कोई बचा ले नेह उसे ढूंढ़ रहे हैं
ऐसी विकट घड़ी में वो करे दिल्ली विहार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।

दर्शन के देव को लगा था मेला
गिरि से आया मौत का रेला
मानव मानव नष्ट हो गए
रह गया गिरि पर देव अकेला
लाशों के अंबार लगे वो बोले दो और चार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।
गांव-गांव लाशें बिखरी हैं, उजड़ गए हैं डेरे
चील और कव्वे, राजा मंत्री लगा रहे हैं फेरे
तड़पते जन का आसमान से देख रहे हैं तमाशा
बांच रहे हैं आएगा क्या हिस्सा तेरे मेरे
रत्तीभर होता ज़मीर, गौचर में लगता दरबार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।
पल पल उड़ रहे थे प्राण पखेरू
तुम रुपयों की बाट जोह रहे थे
मरते जन को देना था संबल
जनपथ पर कटोरा लिए खड़े थे
देखो रे ऐसी होती है दलालों की सरकार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।
पानी रे पानी तूने लिख दी कैसी कहानी
बचपन बुढ़ापा न देखा न देखी जवानी
साथ ले गया कुछ को कुछ समा गए खाई में
सो गया नन्हा बचपन भी मौत की गहराई में
सूनी हो गई गोद सैकड़ों बह गया रे श्रृंगार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।
आशीष की आस लिए आए थे तेरे द्वारे
कौन घड़ी आए थे यहां फूटे भाग हमारे
वीरान हो गई अब तो जीवन की बगिया
तुझे नमन को कैसे जुडेंगे हाथ हमारे
दोष हमारा बतलाओ हे बाबा केदार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।
आशीष मिला आशीष मिलेगा चलती रहेगी रीत
तेरे मेरे बीच सदा ही बनी रहेगी प्रीत
खुले हमेशा तेरे लिए हैं देवालय के द्वार
लेकिन, आने का यहां बस श्रद्धा को आधार
आस्था विश्वास को बनाओ न बाजार
ऐसे राजा को धिक्कार, ऐसे राजा को धिक्कार।।
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कवि परिचय
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वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ”
कवि/गीतकार
संप्रति– पत्रकारिता
शिक्षा– एमकॉम, बीएड, पीजी डिप्लोमा इन कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग एवं मैनेजमेंट।
प्रदेश महामंत्री – राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसियेशन (वॉजा इंडिया)
लेखन– छंद, गीत, ग़ज़ल, कविता, कहमुकरी, माहिया, संस्मरण, कहानी (हिन्दी व लोकभाषा गढ़वाली)
प्रकाशित कृतियां – काव्य सौरभ (संयुक्त काव्य संग्रह), सृजन गुच्छ (संयुक्त काव्य संग्रह), अंग्वाल (संयुक्त काव्य संग्रह- गढ़वाली), वाह रे बचपन (संयुक्त संस्मरण संग्रह हिंदी)।
प्रकाशनाधीन – काव्य व कहानी संग्रह (हिंदी) काव्य व कहानी संग्रह (गढ़वाली)।
विशेष – 26 जनवरी व 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर आयोजित सरकारी कवि सम्मेलनों, राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर कवि सम्मेलनों में प्रतिभाग
-दूरदर्शन देहरादून (हिंदी गढ़वाली) और आकाशवाणी नजीबाबाद से गढ़वाली कविताओं का निरंतर प्रसारण
– वर्ष 1987 से 1997 तक रंगमंच पर (बतौर अभिनेता ) सक्रिय, 1988 से काव्य गद्य लेखन, काव्यमंच पर 1999 से सक्रिय।
– 1995 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जन्मदिवस पर उनके जन्म स्थान पोरबंदर गुजरात से वर्धा महाराष्ट्र तक निकली पैदल यात्रा में प्रतिभाग।
साहित्यिक व पत्रकारिता में उपलब्धियां, सम्मान –
– यूथ आइकॉन राष्ट्रीय मीडिया अवार्ड (पत्रकारिता ) 2015
– मुंशी प्रेमचंद कहानीकार सम्मान- 2007
– विशिष्ट सेवा सम्मान -2013-14
– रीता शर्मा स्मृति साहित्य सम्मान- 2017
– सेवासेतु कवि रत्न सम्मान -2018
– हिंदी साहित्य रत्न सम्मान -2018
– उत्तराखंड साहित्य साधक सम्मान -2019
– राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान -2019
– कोरोना वारियर सम्मान -2020
– कोरोना वारियर “मदद गुरु” सम्मान -2020
– स्पेशल कोरोना वारियर्स सम्मान -2020
मोबाइल – 9412937280, 7906483038
मेल – parth.sahara@gmail.com
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पता -430 टी एस्टेट बंजारावाला, देहरादून, उत्तराखंड। 248001
