वरिष्ठ कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… दोस्तों इस दीवाली नया क़दम भरते हैं,
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पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात

ग़ज़ल
दोस्तों इस दीवाली नया क़दम भरते हैं,
दियों के साथ साथ पटाखे फोड़ते हैं।
प्रदूषण की चिंता करेंगे 31 दिसंबर को,
अभी तो चेहरों पर ख़ुशियाँ बिखेरते हैं।
सस्ते में बिक रहा चाइनीज़ माल छोड़,
हमारे देश के लोगों से माल ख़रीदते हैं।
मिट्टी के चराग़ है रोशनी का प्रतीक तो,
एक चराग़ शहीदों के नाम भी करते हैं।
दीवाली तो है उन गरीब बच्चों की भी,
फ़क़ीरा चेहरों को ख़ुशी दे ख़ुद हंसते हैं।
