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विशेषज्ञ डॉक्टर्स के नाम पर स्वास्थ्य विभाग ने की अयोग्य डॉक्टर्स की तैनाती

डॉक्टर्स की नियुक्ति का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस तरह की नियुक्ति धोखाधड़ी और आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

शब्द रथ न्यूज (ब्यूरो) देहरादून। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग का भी अजब हाल है। विभाग ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुति का ढोल पीटते हुए अयोग्य डॉक्टर्स की नियुक्ति कर दी यानी जो नियुक्ति तिथि तक विशेषज्ञ की योग्यता ही नहीं रखते थे, उन्हें नियुक्ति दे दी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि विभाग को नियुक्ति की ऐसी क्या जल्दबाजी थी जो डॉक्टर्स को आवश्यक योग्यता हासिल करने तक रुका नहीं गया। यह नियुक्ति जनता के स्वास्थ्य सुविधा के लिए की गई या किसी को लाभ पहुंचाने या खुश करने के लिए?

गौरतलब है कि 28 अप्रैल 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की अस्थायी तैनाती का आदेश जारी किया। लेकिन, उस वक्त उक्त 45 में से 10 डॉक्टर ही तैनाती के विशेषज्ञ के रूप में योग्य थे। आठ डॉक्टर तैनाती के आठ महीने बाद भी योग्यता/पंजीकरण पूरा नहीं कर सके। जबकि, दो डॉक्टर आज तक भी पीजी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। यह बहुत ही गंभीर मामला है। अयोग्य डॉक्टरों की तैनाती जनता के जीवन और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

विभाग की इस कारगुजारी को आरटीआई कार्यकर्ता चंद्र शेखर जोशी ने उजागर किया है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर ऐसे डॉक्टरों को विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया, जिनके पास न तो आवश्यक विशेषज्ञता (PG डिग्री) थी और न ही उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल (UMC) का अनिवार्य पंजीकरण। इसके बावजूद विभाग ने उनको तैनाती दे दी। जोशी ने राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।

क्या स्वास्थ्य विभाग को नियमों की नहीं है जानकारी

28 अप्रैल 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की अस्थायी तैनाती का आदेश जारी किया तो नियुक्त किए गए कई डॉक्टरों ने UMC पंजीकरण नहीं कराया था।कुछ डॉक्टरों ने पीजी ही उत्तीर्ण नहीं किया था। ऐसे डॉक्टरों की तैनाती NMCA Act 2019 और उत्तराखंड चिकित्सक व्यवसाय अधिनियम 2005 के खिलाफ है। कानून स्पष्ट कहता है कि बिना पंजीकरण चिकित्सा अभ्यास करना दंडनीय अपराध है।

विशेषज्ञ डॉक्टर के अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत

विशेषज्ञ के तौर पर तैनात चिकित्सकों में शामिल डॉ. नेहा सिद्दीकी की पोस्टिंग जिला चिकित्सालय सितारगंज में की गई थी। आरटीआई कार्यकर्ता जोशी ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उपचार के दौरान जटिलता को सही से संभाल न पाने के कारण एक गर्भवती महिला की मौत हो गई।
इसे अयोग्य और अपंजीकृत डॉक्टर की तैनाती का दुखद परिणाम बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने की हैं यह मांगें

-28 अप्रैल 2025 के आदेश के तहत हुई सभी विशेषज्ञ डॉक्टर्स की तैनाती की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

-जिम्मेदार अधिकारियों और अयोग्य डॉक्टरों की तैनाती कराने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

-अयोग्य डॉक्टरों की तैनाती तत्काल निरस्त हो, जो डॉक्टर पंजीकृत या योग्य नहीं हैं, उनकी तैनाती तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

-भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से पहले UMC/NMC पंजीकरण, पीजी योग्यता और दस्तावेज़ों की पूरी जांच अनिवार्य की जाए।

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