मित्रता दिवस पर विशेष : ओ मेरे मित्रता दिवस के मित्र!
डॉ. अशोक बत्रा
गुरुग्राम, हरियाणा

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ओ मेरे मित्रता दिवस के मित्र!
ओ मेरे मित्रता दिवस के मित्र!
तुम्हें मेरा स्नेह
धौलधप्पा और आलिंगन!
तुम्हारे साथ
आज मैं
अंतरंग क्षण बिताना चाहता हूँ
मेरे समीप आओ।
प्रत्यक्ष न सही
ऑनलाइन ही सही!
फोन से, मैसेज से
या स्माइली से ही सही!
आओ आज ही मिल लो
देख लो
कल्पना की आँखों से
चिप की भुजाओं से!
कल तो मित्रता दिवस रहेगा नहीं
फिर मिलूँगा कैसे?
और जो सदा- सदा के मित्र हैं
हृदय में बसे
वे स्पंदन बनकर
धमनियों में
जिन्दा रहते हैं!
वे कहते हैं
हमें नहीं जरूरत
किसी दिवस विशेष की।
कुछ तो बोलो मित्र!
कुछ तो कहो!
क्यों?
क्या कोई नहीं है मित्र
जो मित्रता दिवस पर बाहें खोले!
मैं प्रतीक्षा में हूँ!
आज रात 12 बजे तक।
सोच लो
फिर जो मिलना हुआ
तो 364 दिन ठहरना होगा!
अरे!
कोई बोलता क्यों नहीं??
डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम
8168115258
