सरकार युवाओं की आत्महत्या रोको, राज्य में 75 प्रतिशत रोजगार स्थानीय के लिए सुरक्षित करो
देहरादून। उत्तराखंड में युवाओं के आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर उत्तराखंड नव निर्माण सेना ने चिंता व्यक्त की है। सेना के सोमवार की जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। मांग की गई है राज्य के रोजगार के विभिन्न निजी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अन्य मांगें भी सेना ने रखी हैं।
नव निर्माण सेना के संस्थापक सदस्य व प्रदेश महासचिव सुशील कुमार ने कहा कि देवभूमि के लाखों शिक्षित युवा व कोरोना महामारी के चलते राज्य में वापस आए प्रवासी रोज़गार जैसे मूलभूत अधिकार से वंचित है। कोरोना ने हालात को बदतर बना दिया। महामारी से पहले भी राज्य के लाखों शिक्षित युवा रोज़गार कार्यालय में रजिस्टर्ड थे I वर्तमान में प्रवासियों की राज्य वापसी से बेरोजगारी के आंकड़ों में भरी वृद्धि हुई। भविष्य की सुरक्षा को लेकर युवाओं में अवसाद है, यही कारण है कि एक महीने में 40 से ज्यादा आत्महत्याएं उत्तराखंड में हो चुकी हैं। लेकिन इस संबंध में चारों तरफ चुप्पी है। राज्य में किराये पर संचालित कार्यशाला, लघु व्यापारी, दुकानदार इकाइयां बंद कर रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक, होटलों, रेस्त्रां में कार्य करने वाले लोग बेरोजगार हो चुके हैं। ऐसे में सरकार युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के उपाय करे। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश महासचिव सुशील कुमार, राजेश चमोली, आदर्श कुमार, दीपक गैरोला, शीशपाल बिष्ट, सतीश सकलानी, आशीष सक्सेना आदि मजुद रहे।
नव निर्माण सेना की मुख्य मांगें
1) औद्योगिक सेक्टर को विश्वास में लेते हुए आंध्रप्रदेश , हरियाणा सहित अन्य राज्यों के तर्ज पर उत्तराखंड में समस्त प्राइवेट सेक्टर, ट्रस्ट, फर्म आदि में राज्य के युवाओं के लिए 75 प्रतिशत रोज़गार सुरक्षित किया जाए
2) औद्योगिक सेक्टर, लघु उद्योगों व राज्य में कार्यरत व्यापारी वर्ग को दोबारा सशक्त करने के लिए विशेष कमेटी का गठन किया जाए, जो वर्तमान आपात हालात में समस्याओं के निदान पर युद्ध स्तर पर काम करे
3 ) अगले तीन महीने तक लघु व्यापारी, किसानों व सभी प्रकार के हाउसिंग लोन पर ब्याज माफ़ हो
4) नवम्बर तक पारदर्शिता के साथ प्रवासी परिवारों सहित सभी गरीब व माध्यम वर्गीय परिवारों को 10 किलो राशन, 2 किलो दाल व खाने का तेल दिया किया जाय
5) शहर व गांव में 200 दिन रोज़गार की गारंटी दी जाए या बेरोजगारी क्षतिपूर्ति राशि 3000 रुपए प्रतिमाह दी जाय
6) लॉक डाउन के स्थान पर अलग अलग व्यापार के व्यवहार के अनुसार टाइम स्लॉट बनाकर बाज़ार नियमित रूप से खोले जाएं। रेस्टॉरेंट का समय सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक हो तो सब्जी किराना अत्यादि के लिए समय सुबह 7 बजे से शाम 3 बजे तक हो I इससे बाजार में आवश्यकता के aनुसार लोगों की आवाजाही कम रहेगी
7) पर्यटन राज्य का मुख्य आधार है। इसे दोबारा संचालित करने के लिए साहसिक निर्णय लिया जाय।
