विजय स्नेही
देहरादून, उत्तराखंड

एक, गांधी वालों सुनो,
गांधी के राम की पुकार,
क्यों पा रहे हो,
हिंदू मन से तिरस्कार,
अब भी कुछ नहीं बिगड़ा, संभल जाओ,
राम के होकर रह जाओ,
इसी में तुम सब की भलाई है
फिर मत कहना,
जान आफत में फसाई है,
अरे कुछ तो
जीवन सुधार लो
गांधी के राम को ही,
पुकार लो