सुगम यातायात: देहरादून में तीन और हरिद्वार में बनेंगे चार कॉरिडोर
देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश में आधुनिक ट्रांजिट नेटवर्क बनाने को लेकर मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक के बाद अधिकारियों ने देहरादून स्थित आईएसबीटी-मसूरी डायवर्जन कॉरिडोर का स्थलीय निरीक्षण किया।
शब्द रथ न्यूज (ब्यूरो)। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में यातायात को सुगम बनाने के लिए शासन स्तर पर कई योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मंथन हुआ। इसके तहत देहरादून में तीन और हरिद्वार में चार कॉरिडोर बनने हैं। मंगलवार को सचिवालय में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद अधिकारियों ने देहरादून के कई जगहों पर स्थलीय निरीक्षण भी किया।
देहरादून में ई-बीआरटीएस 31.52 किमी का मेगा कॉरिडोर
देहरादून शहर में प्रस्तावित ई-बीआरटीएस परियोजना के तहत दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। प्रथम कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक होगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं, इसकी लंबाई 31.52 किमी होगी। बैठक के बाद सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर शहर के मुख्य आवागमन मार्गों को कवर करेगा और सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगा।
देहरादून पीआरटी के तीन कॉरिडोर
दून में पीआरटी परियोजना के तहत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, इनमें पहला क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक तक और दूसरा पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक बनेगा। वहीं, तीसरा गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क तक बनेगा। निगम ने इन कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अनुमोदन के अनुरूप कार्रवाई का अनुरोध किया है। सचिव ने निर्देश दिया कि परियोजना को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (ज्व्क्) मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे शहरी विस्तार सुनियोजित ढंग से हो सके।
17 स्टेशन का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण
बैठक के बाद सचिव ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर (आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन, कुल 17 स्टेशन) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन की विस्तार से जानकारी दी गई। बताया कि स्टेशन निर्माण के लिए 0.64 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी। संबंधित भूमि का स्वामित्व एमडीडीए के अधीन है। प्रबंध निदेशक ने परियोजना में शामिल विभिन्न शासकीय भूमि को शीघ्र निगम को हस्तांतरित करने को कहा है।
त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे को मिली स्वीकृति
त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन मिल गया है। निगम ने स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन भी कर दिया गया है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि पर्वतीय यातायात दबाव को कम करने में भी सहायक होगी।
हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम
हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग-चण्डी देवी-मनसा देवी एवं मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी कराये जाने के लिए अनुरोध बैठक में किया गया। सचिव ने 18 फरवरी की तिथि डीएफसी प्रक्रिया के लिए निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को पीपीपी सेल से वेटिंग कराया जाए। हरिद्वार शहर में पीआरटी परियोजना के तहत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। जिसमें सीतापुर से भारत माता मंदिर, सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर, लालतारा चौक से भूपतवाला व गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल शामिल हैं। इस परियोजना में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं, इसकी कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। यह योजना विशेष रूप से तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
त्रिवेणी-नीलकंठ रोपवे व हरिद्वार रोपवे परियोजनाएं एडवांस स्टेज में
बैठक में सचिव ने उत्तराखण्ड की कार पार्किंग पॉलिसी-2022 का गहन अध्ययन कर भविष्य की सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। कहा कि बिना पार्किंग प्रबंधन के कोई भी ट्रांजिट सिस्टम प्रभावी नहीं हो सकता। सचिव ने स्पष्ट किया कि त्रिवेणी-नीलकंठ रोपवे व हरिद्वार रोपवे परियोजनाएं एडवांस स्टेज में हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र क्रियान्वित किया जाए।
बैठक में मौजूद अधिकारी
बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय जी. पाठक, संयुक्त महाप्रबंधक (एचआर) कृष्णा नन्द शर्मा, संयुक्त महाप्रबंधक (एसएण्डटी) अजय बाबू, संयुक्त महाप्रबंधक (विद्युत) सौरभ शेखर, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जयनन्दन सिन्हा, उप-महाप्रबंधक (सिविल) गुरूलाल सिंह, सेक्शन इंजीनियर सर्वेश कुमार व सेक्शन इंजीनियर अशोक डोभाल उपस्थित रहे।
