Wed. Jan 21st, 2026

कवि जीके पिपिल

वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की एक ग़ज़ल…. हम चाँद होकर भी अपनी चाँदनी को तरसते रहे

जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड —————————————————- गज़ल हम चाँद होकर भी अपनी चाँदनी को तरसते रहे…