Sat. Jul 18th, 2026

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जसवीर सिंह हलधर की हिंदी गज़ल.. क्रोध में धौली नदी हमने उबलती देख ली..

जसवीर सिंह हलधर देहरादून, उत्तराखंड ————————————— ग़ज़ल(हिंदी) ————————— पीर पर्वत की पिघल लावा उगलती देख…

कवि जसवीर सिंह हलधर की एक ग़ज़ल, खलिहान ही उजड़े मिले, महकी मिलीं सब मंडियां..

जसवीर सिंह ‘हलधर’ देहरादून, उत्तराखंड —————————————- ग़ज़ल (हिंदी) —————————— राही सभी थक कर गिरे, चलती…

कवि अमित नैथानी मिट्ठू का एक संस्मरण.. माँ के हाथों और डंडों से हमारी सर्विसिंग भी हुई

अमित नैथानी ‘मिट्ठू’ ऋषिकेश, उत्तराखंड ————————————– अतीत… ————————- इन सर्द शामों में अंगीठी के पास…

कवि/गीतकार वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” की एक रचना.. महाभारत जारी है…

वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” देहरादून, उत्तराखंड ——————————————– महाभारत जारी है… ———————————— अनवरत जारी है महाभारत पिछले…