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तुलसी के बिना अधूरा लगता है घर का आंगन

आभा चौहान
अहमदाबाद, गुजरात
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मैं तुलसी तेरे आंगन की

भारतवर्ष में तुलसी हर आंगन में दिख जाती है। यदि विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो तुलसी ऐसा गुणकारी पौधा है, जिसमें कई औषधीय गुण हैं। लेकिन, हम भारतवासी हर चीज को भावनाओं से देखते हैं। इसी के चलते हमारी तुलसी को घर के एक सदस्य का दर्जा दिया गया है।

कभी हम तुलसी को सजाकर बेटी बना कर विदा कर देते हैं। कभी हम तुलसी के नीचे दिया लगाकर मां की तरह पूजते हैं। तुलसी बिना घर का आंगन अधूरा सा लगता है, ऐसा लगता है कि शायद घर में किसी सदस्य की कमी है। तुलसी से जुड़ी हमारी पुस्तकों, वेदों और पुराणों में कई कथाएं दी गई हैं। चाहे वह भगवान कृष्ण से उनकी प्रेम की कथा हो या फिर भगवान गणेश से उनकी लड़ाई की कथा। तुलसी हमारे लिए हर रूप में पूजनीय रही है। कैसे तुलसी के एक पत्ते ने भगवान कृष्ण का भजन तोल दिया था, भगवान कृष्ण प्रेम के वशीभूत होकर हल्के हो गए।

इसके अलावा बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन, सच तो यह है तुलसी सही में हमारी मां है। यह भी एक मां की तरह ही तो हमारा ध्यान रखती है। अगर सर्दी हो जाए तुलसी का काढ़ा बनाकर पी लो, चर्म रोग हो जाए तुलसी के पत्ते को पीसकर लगा लो। इतना प्यार तो सिर्फ मां ही कर सकती है न। इसलिए तुलसी सदैव हम सब की रक्षा करने के लिए हमारे आंगन में खड़ी रहती हैं।

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