Sat. Apr 18th, 2026

कहीं तेरे प्यार का पानी मेरे इंतज़ार का पानी …

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड


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गीत

कहीं बरसात का पानी कहीं बौछार का पानी
धरातल छू गया जैसे गगन के प्यार का पानी।

भिगोकर मन बदन अपने अति प्रसन्न होता है
कहीं तेरे प्यार का पानी मेरे इंतज़ार का पानी।

उल्फ़त की नदिया में तो हम दोनों ही उतरे थे
किनारों से नहीं देखा कभी मझधार का पानी।

यहां हमने भी देखा है तुम्हारी आंख में झरता
कहीं इनकार का पानी कहीं इक़रार का पानी।

भुलाने से भी ना भूले तुम्हारे संग जो भीगे थे
हृदय तल छू गया जैसे अश्रु की धार का पानी।

जो मेघों से ही बुझती है उसमें क्या करे कोई
बुझा सकता नहीं है प्यास ये संसार का पानी।।

जीके पिपिल, 29072025

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