Uncategorized उत्तराखण्ड साहित्य कवि जीके पिपिल का एक मुक्तक September 7, 2025 admin पानी की गति ही नदी की गहराई बता देती है परछाईं भी एक वज़ूद की…
Uncategorized कवि/शाइर जीके पिपिल की एक गजल August 31, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून। गज़ल तुम्हारा दीदार तो क्या तुम्हारी तस्वीर को तरस गए हम वो…
national उत्तराखण्ड साहित्य जीके पिपिल की एक गजल … नादान है वो इंसा जो सराय को मकां समझ बैठा … August 28, 2025 Shabdradh जीके पिपिल देहरादून ——————————————————————- गज़ल चार आदमियों की ज़मात को कारवां समझ बैठा धुंआ के…
उत्तराखण्ड साहित्य ग़ज़ल सिर्फ़ यही शराब है जिसमें प्याले नहीं खरीदे जाते … August 15, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून। ————————————————————————— गज़ल चिराग़ों को बेचकर कभी उजाले नहीं खरीदे जाते ख़ाली पड़ी…
उत्तराखण्ड काव्य साहित्य कहीं तेरे प्यार का पानी मेरे इंतज़ार का पानी … August 1, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड —————————————————— गीत कहीं बरसात का पानी कहीं बौछार का पानी धरातल…
उत्तराखण्ड काव्य साहित्य मोहब्बत का एहसास होने लगा है … July 20, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ————————————————— गीत मोहब्बत का एहसास होने लगा है वो जब से…
साहित्य ग़ज़ल अपने आप झर जायेंगे पत्ते उम्र के पीले हैं अभी … June 5, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून ————————————————- गज़ल गांठ प्यार की लगी नहीं पूरी बंधन ढीले हैं अभी…
उत्तराखण्ड ग़ज़ल दरार एक होती तो शायद भर भी जाती … June 1, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून। ———————————————- गज़ल दरार एक होती तो शायद भर भी जाती यहां तो…
उत्तराखण्ड साहित्य जीके पिपिल का एक गीत …मैं पतझर हूं और सेहरा हूं … March 21, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून। गीत मैं क़तरा हूं और तन्हा हूं अपनी जलधार में ले लो…
ग़ज़ल जीके पिपिल की एक गज़ल… खरीदार तो थे हम लुटा बाज़ार होकर रह गए March 15, 2025 admin जीके पिपिल देहरादून गज़ल खरीदार तो थे हम लुटा बाज़ार होकर रह गए क़ुदरत के…