Tue. Jun 2nd, 2026

कवि/शाइर जीके पिपिल

जीके पिपिल की एक गजल … नादान है वो इंसा जो सराय को मकां समझ बैठा …

जीके पिपिल देहरादून ——————————————————————- गज़ल चार आदमियों की ज़मात को कारवां समझ बैठा धुंआ के…

सिर्फ़ यही शराब है जिसमें प्याले नहीं खरीदे जाते …

जीके पिपिल देहरादून। ————————————————————————— गज़ल चिराग़ों को बेचकर कभी उजाले नहीं खरीदे जाते ख़ाली पड़ी…