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डॉ. अजीत मोहन जौहरी की दोबरा नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

सेवानिवृत्ति के दो महीने बाद ही उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद (यूएमसी) मिल गई नई जिम्मेदारी। वर्तमान में डॉ. जौहरी परिषद के सदस्य भी हैं, इसलिए भी उनकी नियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है।

देहरादून। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग उत्तराखंड से गत 31 को संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के लगभग दो महीने के अंदर ही उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद (यूएमसी) में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपा गया है। उनकी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

उत्तराखंड आयुर्विज्ञान परिषद की ओर से गत 29 मई को जारी आदेश संख्या 4158 के अनुसार डॉ. जौहरी को डिप्टी रजिस्ट्रार (कार्यवाहक) के रूप में परिषद के दैनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था नियमित डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति होने तक प्रभावी रहेगी। वर्तमान में डॉ. जौहरी परिषद के सदस्य भी हैं। इस नियुक्ति के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता व नियमों के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट चन्द्रशेखर जोशी ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत परिषद से विस्तार से जानकारी मांगी है।

आवेदन में उन्होंने नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव, नोटशीट, फाइल अभिलेख, नियमावली, चयन प्रक्रिया, बैठक की कार्यवाही (मिनट्स), रिक्त पद की स्थिति व पूर्व डिप्टी रजिस्ट्रार से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसके अतिरिक्त डॉ. जौहरी की वर्तमान नियुक्ति, पदनाम, वेतनमान व उनसे संबंधित प्रशासनिक आदेशों की जानकारी भी मांगी गई है।

आरटीआई आवेदन में यह भी पूछा गया है कि क्या डिप्टी रजिस्ट्रार के नियमित पद पर नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन जारी किया गया था, क्या किसी चयन प्रक्रिया का पालन किया गया और क्या अन्य पात्र अभ्यर्थियों पर भी विचार किया गया। साथ ही यह जानने का प्रयास किया गया है कि कार्यवाहक डिप्टी रजिस्ट्रार के रूप में डॉ. जौहरी को कोई अतिरिक्त प्रशासनिक, वित्तीय अथवा वैधानिक अधिकार प्रदान किए गए हैं या नहीं। जोशी ने परिषद से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि वर्तमान व्यवस्था केवल अंतरिम है या नियमित नियुक्ति तक जारी रहेगी। वहीं, नियमित नियुक्ति के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का माहौल

गौरतलब है कि राज्य के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों में शामिल रहे डॉ. अजीत मोहन जौहरी को सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दिए जाने से प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग के हलकों में चर्चा का माहौल है। अब निगाहें परिषद की ओर से आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराने वाले अभिलेखों पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों व पारदर्शिता के मानकों का किस हद तक पालन किया गया।

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