मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ कुमार विश्वास ने जमाया रंग
-स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित किया गया देशभक्ति कवि सम्मेलन
देहरादून (Dehradun)। स्वामी विवेकानंद की जयंती (swami Vivekanand birthday) पर मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास (CM house) में ‘राष्ट्रभक्ति कवि सम्मेलन’ (rashtrabhakti Kavi sammelan) आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन में डॉ कुमार विश्वास (Dr Kumar vishwas), कविता तिवारी, राजीव राज, रमेश मुस्कान और तेजनारायण शर्मा ‘बेचैन’ ने काव्य की रसधार से सभी को सराबोर कर दिया।

कुमार विश्वास ने ‘है नमन उनको जो इस देह को अमरत्व देकर, इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गए हैं, नमन उनको जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरातल पर गिर पड़े, आसमानी हो गए’ के माध्यम शहीदों को नमन किया। विश्वास ने गंगा पर भी कविता सुनाई। ‘खिलौने साथ बचपन तक, जवानी बस रवानी तक, सभी अनुभव भरे किस्से बस बुढ़ापे की कहानी तक’ जवानी में बस सहारे हैं बस जिंदगी भर के, मगर ये जिंदगी के आखिरी पल का सहारा है, ये गंगा का किनारा है, ये गंगा का किनारा है’ सुनाकर कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्वास ने अपना प्रसिद्ध मुक्तक ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है से भी खूब वाहवाही लूटी।
कविता तिवारी ने मां शारदा की वंदना करते हुए अपनी ओजस्वी सुर में ‘’धन द्रव्य सम्पदा तो नहीं मांग रही हूं, जो मांग रही हूं वो सही मांग रही हूं, कविता की पंक्ति पंक्ति राष्ट्र जागरण बने, आशीष आप सब से यही मांग रही हूं’ सुनाई। उत्तराखण्ड की दिव्यता व पवित्रता को नमन करते हुए उन्होंने पढ़ा ‘धरा यहां धरती के सम्मुनत भाल जैसा है, यहां की संस्कृति का रूप शुभटक साल जैसा है, कोई उपमा में सारे विश्व को कह दे शिवाला तो, हमारा देश पावन आरती के थाल जैसा है’ संस्कार उन्होंने खूब तालियां बटोरी।
राजेश राज ने बचपन पर आधारित कविता ‘यादें झीनी रे झीनी रे’ का मधुर गान कर लोगों को बचपन में लौटा दिया। तेज नारायण शर्मा ‘बेचैन’ ने कोरोना काल में घटित घटनाओं पर आधारित रचना सुनाई।
कोविड महामारी के चलते कवि सम्मेलन में आमंत्रित थे सीमित लोग
कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए सीमित संख्या में आमंत्रित किए गए लोगों के बीच राष्ट्र, संस्कृति, सेना की वीरता, मातृ शक्ति सहित विभिन्न विषयों पर काव्य प्रस्तुतियां की गईं। डा. कुमार विश्वास ने अपने अंदाज में कवि सम्मेलन को संचालित कर लोगों को कवि सम्मेलन में सहभागी बनाया। राष्ट्रभक्ति, देश के लिए बलिदान की भावना, भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रस्तुत की गई कविताओं पर सभागार दर्शकों की तालियों से गूंजता रहा। बीच-बीच में कवियों ने व्यंग्य से दर्शकों को हंसाया भी और कविताओं के माध्यम से संदेश भी दिया।
कविताओं की गहराई को समझने की जरूरत: मुख्यमत्री
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत (CM trivendra Singh Rawat) ने कहा कि स्वामी विवेकानंद हम सभी के आदर्श हैं। उन्होंने पूरी दुनियां में भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता का परचम लहराया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति उस छाते की तरह है जिसके नीचे सभी दर्शन, विचार, मत, सम्प्रदाय खुली सांस के साथ आश्रय लेते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रोताओं को कविताओं की गहराईयों को समझना चाहिए। कविताओं के संदेश को समझ कर हम समाज, शासन में सुधार करने की कोशिश भी करते हैं। मुख्यमंत्री ने कवियों की सराहना करते हुए कहा कि लम्बे समय बाद छोटे स्तर पर इस तरह का आयोजन किया गया है। देश कोविड से जंग जीतने की ओर है। वैक्सीनेशन भी शुरू किया जा रहा है। आशा है कि हम जल्द ही कोरोना से पूरी तरह से मुक्त होंगे और बड़े स्तर पर इस तरह का आयोजन करेंगे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, हरक सिंह रावत, धन सिंह रावत, विधायक गणेश जोशी, हरबंस कपूर, सचिव राधिका झा, दिलीप जावलकर, लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम भरतवाण आदि मौजूद रहे।
