प्रोफेसर अलका अरोड़ा की कहती हैं… नव वर्ष का दिन खुशी का पर्याय
डॉ अलका अरोड़ा
प्रोफेसर, देहरादून
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नूतन वर्ष एक आह्लादित उत्सव
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नव वर्ष यानी नूतन वर्ष का जिक्र आते ही दिलो-दिमाग, ज़हन, जुबां, शब्दों और भावों पर खुशी की लहर दौड़ जाती है।
भारतवर्ष में नववर्ष का पर्याय खुशी का उत्सव माना गया है। जाति-पाति, उम्र, छोटे-बड़े के बंधन से मुक्त होकर प्रत्येक भारतवासी पहली जनवरी को नव वर्ष की पावन बेला को अंतर्मन से प्रफुल्लित होकर मनाता है। दुनिया भर में नया साल अलग-अलग दिन में मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नववर्ष 1 जनवरी को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। 31 दिसंबर की रात खत्म होते ही 1 जनवरी के रात्रि से ही व्हाट्सएप पर परिचित, मित्र, सगे-संबंधी, बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी सुंदर-सुंदर फोटो भेजते हैं और सोशल मीडिया द्वारा अपने दूर बैठे मित्रों और रिश्तेदारों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं।
नववर्ष के दिन लोग अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए नई योजनाएं बनाते हैं। नववर्ष का प्रथम दिन सभी के लिए बहुत महत्व रखता है, बच्चे भी अपनी खुशियां जाहिर करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। बच्चों के लिए भी यह दिन बहुत महत्वपूर्ण एवं सुंदर पल लेकर आता है क्योंकि उन्हें अपने माता-पिता से सुंदर सा उपहार मिलते हैं जैसे खिलौने, कपड़े आदि। इस दिन कुछ लोग अपने परिवार के साथ ही घर पर उत्सव मनाते हैं। नववर्ष की बेला बहुत पावन तथा मधुर होती हैं।
इस दिन लोग अपने सारे दुख दर्द भूल कर नई शुरूआत करने की सोचते हैं। साल का यह पहला दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जनवरी के दिन भोर सवेरे लोग मंदिर जाकर भगवान को मत्था टेकते हैं।
नववर्ष का नूतन दिन सभी प्रकार के वैमनस्य एवं रंज-ओ-गम भूलने का दिन होता है। इस दिन हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई अपने सारे गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को गले लगाकर नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। नए साल के दिन लोग नाना प्रकार के पकवान तथा मिठाई बनाते हैं और एक दूसरे के साथ मिल बांटकर खाते हैं। प्राचीन काल से लेकर आज तक यह दिन प्रलेक व्यक्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सभी के लिए नया साल नई नई आशाएं नई खुशियां नई उम्मीदें लेकर आता है। पुराने साल के आखिरी दिन आखिरी रात के बारह बजते ही लोग नए साल के आगमन की खुशी में झूम उठते हैं और एक-दूसरे को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। साथ ही लोग शहर से लेकर गांव तक गली से लेकर मुहल्ले तक ढेर सारे पटाखे फोड़ते हैं गीत गायन नृत्य करते हैं।
नया साल का यह दिन सबके लिए बहुत ही खास होता है। हर और खुशी भरा समां बंध जाता है, इसलिए लोग इस दिन अपने बीते साल की सभी ग़लतियों पर ध्यान देते हुए, उन्हें न दोहराने का प्राण लेते हैं और सफलता प्राप्त करने के लिए नई शुरूआत करते हैं। हर छोटे-बड़े खास और आम के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता हैं। इस दिन कई लोग अपने नए व्यापार की शुरुआत भी करते हैं। लोग जंगलों और बाग में प्रकृति का आनंद उठाने के लिए दार्शनिक स्थलों पर व पर्यटन स्थलों पर जाते हैं।
अपने नए साल के पहले दिन को लोग बहुत ही सुंदर और बेहतर बनाने के लिए पहले से ही कई प्रकार के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार किये रहते हैं। जैसे कुछ लोग जोर-शोर से गीत-संगीत की महफिल, कवि सम्मेलन, मुशायरा आदि का आयोजन करते हैं। कुछ लोग अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों के साथ घर से बाहर वक्त बिताना भी पसंद करते हैं। मित्र-परिवार के साथ जाकर स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाते हैं और एक जनवरी के दिन भोर सवेरे ही लोग मंदिर जाकर भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं तथा आने वाले वक्त की खुशियां मांगते हैं
सभी बड़े शहरों में जैसे बैगलौर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, केरल इत्यादि में सुरक्षा बढ़ा दिया जाता है, क्योंकि ऐसे समय में रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों में लोगों की तादाद बढ़ जाती है। असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं। जिसके कारण दंगा फसाद, चोरी, छेड़छाड़, डकैती एवं खून खराबा होने का खतरा रहता है। देश की व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए भारत में नववर्ष का पहला दिन 1 जनवरी लगभग सभी कार्यालय खुले रहते हैं क्योंकि यह दिन प्रतिबंधित अवकाश होता है।
पूरे विश्व भर में 31 तारीख की रात को बड़े से लेकर छोटे शहरों में मनोरंजक आयोजन आयोजित किए जाते हैं। नववर्ष के कार्यक्रमों में बड़े बड़े सितारे और मशहूर लोग भाग लेते हैं। तथा आम जनता झूम-झूम कर प्रत्येक क्षण का आनंद लेती है।
न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व में अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाने वाले नववर्ष का आनंद प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य अनुसार मनाता है। पुरानी दुख दर्द और नकारात्मक चीजों को भूल कर नए साल में एक नई शुरुआत की जाती है।
नए साल से कुछ दिन पहले कुछ लोग अपने आने वाले साल के लिए न्यू ईयर रेजोल्यूशन भी बनाने की परंपरा से जुड़ गए हैं अर्थात पुरानी बातों, चीजों एवं कार्यो को ना दोहराने की प्रवृत्ति इस दिन विश्व के सभी राजनेता दूरदर्शन, आकाशवाणी, ब्लॉग, फेसबुक, फ्लेक्स इत्यादि, सोशल मीडिया के द्वारा लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं और जनता हर्ष उल्लास से भर उठती है।
नव वर्ष के दिन लोग अपने घरों, दुकानों की साफ सफाई करते हैं और वृक्षारोपण भी करते हैं।
नव वर्ष के आगमन से पूर्व ही संध्या समय से रात्रि तक उत्साह के रूप में उत्सव मनाया जाता है इस दिन रात को लोग खुशी जाहिर करने के लिए नाचते हैं गाते हैं और खूब मजे करते हैं। लोग पूरी रात जागकर नए साल का इंतजार करते हैं। अपने नए साल के पहले दिन के साथ-साथ अपने आने वाले भविष्य को लेकर लोग बहुत सचेत होकर बहुत ही सुंदर और बेहतर तरीके से अपनी कार्यप्रणाली का गठन करते हैं तथा भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमारा नया साल बहुत ही खुशियों से भरा हो और जीवन के हर क्षेत्र में हमें सफलता और कामयाबी मिले। इस दिन कई लोग अपने नए रिश्तो की, नये व्यापार की, जमीन जायदाद सम्बधी खरीद फरोख्त की शुरुआत भी करते हैं।
नया साल का यह दिन सबके लिए बहुत ही खास होता है। इसलिए लोग इस दिन अपने बीते साल की सभी गलतियों पर ध्यान देते हुए अपने सफलता प्राप्त करने का प्रण करते हैं
व्यापारी अपने व्यापार को आगे ले जाने की नई तरकीबें सोचते है। तो कुछ लोग अपने अंदर अच्छी आदतें डालने की कोशिश करते हैं।
नए साल के दिन लोग एक दूसरे को कई प्रकार से शुभकामनाएं संदेश भेजते हैं। लोग एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्ड देकर खुशियों का इजहार करते हैं तथा शुभकामना संदेश देते हैं।
नव वर्ष 2021 की बात करें तो मन द्विधा पूर्ण स्थिति में से गुजर रहा है।
वर्ष 2020 आशा और निराशा का मिलाजुला वर्ष रहा । मैं अपनी ही लिखी दो पंक्तियों से वर्ष 2020 और 2021 के बीच की स्थिति का वर्णन कुछ इस प्रकार कर रही हूं…
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साल 2021
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नये साल का नया गौरव, नया उजाला लायेगा
साल पुराना उलझन भरा उदास सा जायेगा।
बहुत रहा संघर्ष दिक्कते रही बहुत परेशानी
आने वाले पल से खास उम्मीद हमने लगा ली।
आशा भरा रहेगा अपना हर आने वाला क्षण
इसी आस, पक्के इरादे से बढ़ रहे अनवरत।
यूँ तो जिन्दा रहनी चाहिए ऊँची ख्वाहिशे
आसमाँ तक उडान भरती निश्छल चाहते।
वक्त सब गुजर ही जाता है चाहे जैसा हो
बुरे दौर के बीत जाने की कर रहे गुजारिशें।
समय धोड़ा सा कष्टकारी रहा साल बीस का
महामारी का स्वरूप भयावह- विकराल सा।
काम काज, खेती और राजनीति
शिक्षा सहित सभी नर नारी पर बुरी बीती।
बाल मन भी कुंठित कुत्सित खूब रहा
वृद्ध जनो पर तो बहुत भंयकर भारी रहा।
ईश्वर मगर दयालु बहुत ,हम सब पर रहा
हिनुस्तान फिर भी ,दुनिया में मिसाल बना।
आने वाले साल से बहुत सी आशाये होगी
2021 दुल्हिन की मानिंद जीवन में आयेगा।
पुरानी उजडी दुनियाँ को खूब सजायेगा
बाल व्यस्क नर नारी सभी को महकायेगा।
प्रण लिये मैं नये साल का आगाज़ करूंगी
बीस वाली उदासी इक्कीस ना साथ रखूँगी।
नये विश्वास नई ऊर्जा उत्साह से आगे बढ़ेंगे
बदल इतिहास 21में नया हिन्दुस्तान लिखेंगे।
जहाँ नया सवेरा नई भोर का सूरज चमकेगा
गहरा तम विश्वास की ओट में जा छिपेगा।
भारत भूमि का हर एक वासी मुस्कुरायेगा
आह्लादित 2021 सब पर खुशी बरसायेगा।।
