Wed. Jan 21st, 2026

जीके पिपिल का एक मुक्तक

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड
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चाहने वाले ना होते तो हुस्न दुनियां में मशहूर ना होता
अगर नारी ना होती तो किसी काम का सिंदूर ना होता
गुजारने को तो किसी भी तरह उम्र गुजार भी देते लोग
जो नारी ना होती तो ज़िंदगी में आनंद भरपूर ना होता।।

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