कवि पागल फकीरा की एक रचना… मैं हिन्दी का बेटा हूँ, मुझे उर्दू ने संभाला है…
पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात

————————————–
मैं हिन्दी का बेटा हूँ, मुझे उर्दू ने संभाला है,
मेरी शिक्षा उत्तम है, तालीम भी आला है।
मिली है तालीम ज़िन्दगी के उन तज़ुर्बों से,
वह अनुभव ही मेरी ज़िन्दगी की शाला है।
प्यार, इश्क़ और मोहब्बत भरी दुनिया में,
मोहब्बत भरा मेरा ये जीवन भी निराला है।
इस महफ़िल की रौनक से वास्ता नहीं मेरा,
मेरी ज़िन्दगी में तो तेरे हुस्न का उजाला है।
नफ़रत और बग़ावत के इस दौर ने छीना,
ज़िन्दगी से चैन-ओ-सुक़ून का निवाला है।
रुसवाई और ग़मों से भरी मेरी ज़िन्दगी में,
तेरी मदमस्त आँखें मेरे लिये मधुशाला है।
तेरी ज़िन्दगी में भले मेरा कोई वजूद नहीं,
“फ़क़ीरा” के ख़्वाबों में उसकी मधुबाला है।

शुक्रिया सर