सरकार कोचिंग संस्थानों को खोले, सोसाइड करने वालों के परिजनों को दे 20 लाख का मुआवजा
देहरादून। उत्तराखंड नवनिर्माण सेना ने राज्य में कोचिंग संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से खोलने और किराए में छूट दिए जाने की मांग की है। सेना की ओर से कहा गया है कि बेरोजगारी के कारण कोचिंग संचालक आत्महत्या कर चुके हैं, उनके परिवार निसहाय हैं। इसलिए सरकार सोसा इड कर चुके लोगों के परिजनों को 20 लाख रुपए का मुआवजा दे। सेना की ओर से सोमवार को मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन भेजा गया है।
उत्तराखंड नवनिर्माण सेना के संस्थापक व प्रदेश महासचिव सुशील कुमार ने कहा कि राज्य में लॉक डाउन के चलते कोचिंग संस्थानों व उनमें काम करने वाले लाखों शिक्षित युवा बेरोजगार होकर घरों पर बैठे हैं। राज्य ने गत वर्षों में एजुकेशन हब के रूप में पहचान बनाई है। हाल के वर्षों में देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, रुड़की सहित हल्दवानी, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, कोटद्वार आदि क्षेत्रों में कोचिंग संस्थानों का विस्तार हुआ है। हजारों शिक्षित युवा इन संस्थाओं में कार्यरत हैं। लेकिन, लॉक डाउन के बाद से ये बंद पड़े हैं। इन्हे खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अवसाद के चलते 100 से ज्यादा आत्महत्या की दुर्भग्यपूर्ण घटनाएं डेढ़ महीने में हो चुकी हैं। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के चलते देहरादून के पटेलनगर में कोचिंग सेंटर संचालक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। क्या इस तरह की दुखद घटनाओं पर रोक लगाने की राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं हैं I उन्होंने कहा कि मांगपत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि राज्य के लाखों शिक्षित युवाओं व तैयारी करने वाले लाखों प्रतियोगिओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए त्वरित सार्थक कदम उठाये जाएं। ज्ञापन देने वालों में राजेश चमोली, विलास गौड़, सुशील कुमार, दीपक गैरोला, संस्थान संचालक अमित मिश्रा, गजेंद्र रावत, सुशील कुमार सिंह, आशीष यादव आदि शामिल रहे।
उत्तराखंड नवनिर्माण सेना की मांगें
-चरणबद्ध तरीके से राज्य के कोचिंग संस्थानों त्वरित को खोला जाए
-भवन किराए को लेकर उचित नीति निर्धारित कर किराए में छूट प्रदान की जाय
-देहरादून के पटेलनगर में खराब आर्थिक स्थिति के चलते कोचिंग सेंटर संचालक द्वारा उठाये दुर्भाग्यपूर्ण आत्महत्या जैसे कदम के चलते हुई मौत के परिपेक्ष उनके परिवार को 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए
