Mon. Aug 31st, 2026

गज़ल

जीके पिपिल की एक गजल … नादान है वो इंसा जो सराय को मकां समझ बैठा …

जीके पिपिल देहरादून ——————————————————————- गज़ल चार आदमियों की ज़मात को कारवां समझ बैठा धुंआ के…

सिर्फ़ यही शराब है जिसमें प्याले नहीं खरीदे जाते …

जीके पिपिल देहरादून। ————————————————————————— गज़ल चिराग़ों को बेचकर कभी उजाले नहीं खरीदे जाते ख़ाली पड़ी…

जीके पिपिल की एक गज़ल … कहते तो वो पूरा आसमां दे देता मगर मैंने सितारा मांगा

जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ————————————————— गज़ल कहते तो वो पूरा आसमां दे देता मगर मैंने…