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कवि/शाइर जीके पिपिल की भावपूर्ण गज़ल

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड

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गज़ल

कभी तुम दिल को कुरेदकर देखना हमारी याद दबी मिलेगी
दोस्ती के निशान छुपे मिलेंगे प्यार की बुनियाद दबी मिलेगी

जिसको कभी मिटा ना सकेंगी शक और स्वार्थ की आंधियां
रोशनी अपनी शम्में दोस्ती की तुमको बेतादाद दबी मिलेगी

कुछ और तो रहा नहीं मेरे पास जो तुमको वसीयत करता
खुलूस का यही खज़ाना मिलेगा यही जायदाद दबी मिलेगी

यकीं ना हो तो कभी मेरी कब्र से मिट्टी को हटा कर देखना
मोहब्बत की कभी ख़त्म ना होने वाली मियाद दबी मिलेगी

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