उत्तराखंड सरकार कोरोना पर कन्फ्यूज, सरकार के आदेशों से आमजन परेशान
वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ”
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देहरादून। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने में उत्तराखंड सरकार फिसड्डी साबित हो रही है। संक्रमण रोकने के उपाय को लेकर सरकार पूरी तरह कन्फ्यूज है। रोज नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। इन अधकचरे आदेशों से आमजन परेशान हो गया है।
अब सरकार ने नया आदेश करवाया है कि बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वालों के लिए कोविड-19 की जांच जरूरी नहीं है। साथ ही दो दिन होटल व होम स्टे में रहने शर्त भी खत्म कर दी है। अब कोई भी पर्यटक कोरोना वायरस की जांच के बिना उत्तराखंड आ सकता है। लेकिन, उसे देहरादून स्मार्ट सिटी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यह व्यवस्था आज (23 सितंबर) से लागू हो गई है।
बार-बार बदली जा रही व्यवस्था
उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बीते दिन (मंगलवार) गाइडलाइन के संशोधित आदेश जारी किए। जिसमें नई व्यवस्था बताई गई है। पहले के आदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को कोरोना संक्रमण की जांच करवाना अनिवार्य किया गया। फिर उसमें संशोधन कर राज्य के निवासियों व पर्यटकों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई। पर्यटकों के लिए मान्यता प्राप्त लैब से कोविड जांच की नेगेटिव रिपोर्ट व बॉर्डर पर एंटीजन टेस्ट कराने पर ही उत्तरखंड आने की अनुमति की बात कही गई। पर्यटकों को होटल या होम स्टे बुकिंग यानी उत्तराखंड में दो दिन ठहरना अनिवार्य किया गया था। लेकिन, अब यह व्यवस्था भी खत्म कर दी है। उत्तराखंड में प्रतिदिन बदलती इन व्यवस्थाओं व आदेश जारी होने से सवाल उठना लाजिमी है कि यह आदेश 21वीं सदी की लोकतांत्रिक सरकार के हैं या पर्दे पर चलती किसी फिल्म में दर्शाएं जा रहे आदिकालीन काबिले के?
रोज-रोज के आदेश से लोगों में भरी असमंजस
सचिवालय में बैठकर रोज नए-नए आदेश जारी करना – करवाना सरकार व अफसरों के काम की गिनती में शामिल हो जाता है। लेकिन, लोग इन रोज-रोज के आदेशों से कितने परेशान हैं, इससे इन्हें कोई वास्ता शायद नहीं है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, बंगाल सहित पूर्वोत्तर राज्यों से लोग फोन कर परिचितों से पूछ रहे हैं कि उत्तराखंड आएं या नहीं। वहां रोज नियम बदल रहे हैं। पता चला.. घर से निकलते समय मानक कुछ थे और जब वहां पहुंचे तो मानक ही बदल जाएं??
आईएमए ने भी सरकार व डीएम को बताया नाकाम
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी उत्तराखंड सरकार और डीएम देहरादून को कोरोना से निपटने में नाकाम बताया है। आईएमए ने आरोप लगाया है कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए सरकार व डीएम प्राइवेट लैब को निशाना बना रहे हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं किया गया तो प्राइवेट डाक्टर प्रैक्टिस बंद कर देंगे।
