Fri. May 15th, 2026

शहीद दिवस पर विशेष.. कवि जसवीर सिंह हलधर का एक गीत.. भगत भूल कर भी मत आना भारत भू की मांटी में

जसवीर सिंह हलधर
देहरादून, उत्तराखंड
———————————–

शहीद भगत सिंह और कवि
———————————————–
भगत भूल कर भी मत आना भारत भू की मांटी में।
बहुत बुरे हालात हो गए गठ बंधन परिपाटी में।

नाम शहीदे आजम है बस भाषण वाजी नारों में,
सरकारी फाइल में अब भी नाम लिखा गद्दारों में,
यदि भूखों की बात करोगे आतंकी कहलाओगे,
मंदिर मस्जिद के झगड़े में बिना बात फस जाओगे,
बापू का भी चश्मा टूटा दीमक लागी लाठी में।
भगत भूल कर भी मत आना भारत भू की मांटी में।।1

पट्टे पर आजादी आयी ब्रिटिश ताना बाना है,
शासन कालों का है लेकिन आसन वही पुराना है,
देश भक्ति को कहते नेता अब बीमारी खांसी की,
आंखे भर आएंगी हालत देखोगे यदि झांसी की,
मेरी बात असत्य लगे तो देखो जाकर घाटी में।
भगत भूलकर भी मत आना भारत भू की मांटी में।।2

भोग विलासा की कीमत है इज्जत ना वनबासी की,
एम ए बी ए खोज रहे हैं नौकरियां चपरासी की,
ढेरों में इज्जत लुटती है जय ढोंगी संन्यासी की,
रीति वही है नीति वही है सरकारी अय्यासी की,
कस्बों में वो नंगापन जो पहले था चौपाटी में।
भगत भूल कर भी मत आना भारत भू की मांटी में।।3

सत्य अंहिंसा नाम नहीं था राम लला थे तम्बू में,
भारत मुर्दा बाद गूंजता श्रीनगर और जम्बू में ,
बहुत बड़ी तादात देश में घुसपैठी भी रहते हैं,
सरे आम गैया काटन की बात मंच से कहते हैं,
‘हलधर’ याद तुम्हारी आयी दर्द हो रहा छाती में।
भगत भूल कर भी मत आना भारत भू की मांटी में।।4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *