काव्य साहित्य कवि/शाईर जीके पिपिल का एक मुक्तक April 12, 2024 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ————————————————————– हमें मोहब्बत की नदी में इस पार से उस पार होना चाहिए था भले ही हमें नाव पुरानी मिलती उसमें सवार होना चाहिए था अब नदिया के किनारे से मौजों को ताकने से क्या हांसिल है हमें नदी में उतरना चाहिए था मौजों से प्यार होना चाहिए था। Tags: कवि/शाइर जीके पिपिल, काव्य, मुक्तक, साहित्य Continue Reading Previous तारा पाठक की एक रचना, नवरात्रि एवम नव संवत्सरNext तारा पाठक की कहानी … देशी ब्वारी_पहाड़ी ब्वारी More Stories उत्तराखण्ड देहरादून साहित्य शालनियों के कहानी संग्रह ‘शाम–सवेरे’ का हुआ लोकार्पण January 16, 2026 Shabdradh national उत्तराखण्ड साहित्य रजनीश त्रिवेदी आलोक को मिला जबलपुर में “क्रांतिवीर पं विद्यासागर शर्मा सम्मान” November 26, 2025 Shabdradh national साहित्य जयपुर में मुंशी प्रेमचंद सम्मान से भावनगर के प्रफुल्ल पंड्या ‘पागल फ़क़ीरा’ सम्मानित November 17, 2025 Shabdradh Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.