Sun. Oct 18th, 2026

नैतिकता की बात चले तो.. लब पर ताले पड़ जाते हैं..

डॉ अलका अरोड़ा, देहरादून
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जवाबदेही
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किसी ने योग दिया
किसी ने लंगर

किसी ने दिया देसी
किसी ने विदेशी

कोई हत्या कर रहा है
कोई डाल रहा है डकैती

इतने सारे प्रश्न हमारे
मन को उलझा रहे हैं

कुछ सवालों का जवाब है गौण
व्यवस्था बिगड़ रहा है कौन ??

नैतिकता की बात चले तो
लब पर ताले पड़ जाते हैं

संस्कारों की बात उठे तो
कई सवाल फिर सर उठाते

बेटी बचाओ बेटी बचाओ
के नारे फिर लगाता कौन

जब इज्जत की बात उठे तो
धज्जियाँ फिर उड़ाता कौन

नेताओं पर बोलना भारी
जनता खड़ी लाचार बेचारी

कहीं भेद कहीं भाव की जंग है
कहीं जात और पात का रंग है

कहीं पीट रही नर को नारी,
कहीं जल रही औरत बेचारी

कोलाहल है चारों ओर
फिर पाठ अमन का पढ़ा रहा है कौन

जीवन हुआ है अस्त-व्यस्त
कोई बोलने वाला नहीं

अपनी-अपनी जिम्मेदारी लेकर
खुद में संतुष्ट होना सीखो

तोलमोल कर जीवन जी लो
अपने प्रश्नों का हल
खुद के ही भीतर तुम खोजो।

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