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पागल फकीरा की एक रचना… पूनम की चाँदनी और तेरा मुझसे साक्षात्कार हो कभी

पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात


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पूनम की चाँदनी और तेरा मुझसे साक्षात्कार हो कभी,
हक़ीक़त में भी मुलाकात हो ऐसा चमत्कार हो कभी।

ख़्वाबों में अक़्सर तुम्हारा चेहरा दिखाई देता है मुझे,
नींद से आँखें खोलूँ और तेरे हुस्न का दीदार हो कभी।

प्यार, मोहब्बत में धोखेबाज़ी बहुत देखी है मैंने यहाँ,
ज़िन्दगी में इतनी सी आरज़ू है मेरी दिलदार हो कभी।

हुस्न की जिस दौलत से मालामाल हो तुम इस जहाँ में,
वक़्त की बेबसी साथ हुस्न से तुम भी नादार हो कभी।

इश्क़ में बदक़िस्मती “फ़क़ीरा” के साथ साथ चलती है,
मोहब्बत का मुझे नशा है तू भी उतनी ख़ुद्दार हो कभी।

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