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वरिष्ठ कवि/शाइर पागल फ़क़ीरा …. आपकी ये बात हमें मंज़ूर नहीं कभी,

पागल फ़क़ीरा
भावनगर, गुजरात


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ग़ज़ल

आपकी ये बात हमें मंज़ूर नहीं कभी,
इश्क़ का ऐसा कोई दस्तूर नहीं कभी।

इश्क़ का इल्ज़ाम लगा आशिक़ों पर,
इसमें दिल का कोई क़सूर नहीं कभी।

इश्क़ में मंज़िल की चाहत रखने वालों,
मंज़िल का कोई रास्ता दूर नहीं कभी।

ज़माने को भी इश्क़ का इल्म है कहाँ,
जिनकी रागों में कोई सुरूर नहीं कभी।

ज़माने के ज़ुल्म-ओ-सितम के आगे,
फ़क़ीरा तो आदत से मजबूर नहीं कभी।

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