श्रम कानूनों में कटौती से उबाल, मुख्यमंत्री व श्रम मंत्री के पुतले फूंके
देहरादून। उत्तराखंड सरकार के श्रम कानूनों में कटौती का ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने विरोध किया। कार्यकर्ताओं और श्रमिकों ने विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के पुतले फूंके।
सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने श्रम कानूनों को लगभग समाप्त कर दिया गया है। मजदूरों को गुलाम बनाने की ओर धकेल दिया है। अब श्रमिको की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी। कानून में कटौती से मजदूर बर्बादी के कगार पर आ जायेगा। उन्होंने कहा कि कारखाना अधिनियम में संशोधन कर 8 के बजाय 12 घण्टे काम करवाने का निर्णय अव्यवहारिक है। यह श्रमिकों के साथ क्रूरता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टेंडिंग मॉडल ऑर्डर के तमाम प्रवधानों को समाप्त कर दिया गया है, जबकि, सीटू सहित अन्य ट्रेड यूनियनों ने सरकार को प्रत्यावेदन दिए थे, जिन्हें दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सीटू औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन कतई स्वीकार नहीं करेगा। मजदूरो के हितों के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। सीटू कार्यालय के बाहर पुतला फूंकने वालों में भगवंत पयाल , रविन्द्र नौडियाल, मामचंद, एसएफआई के महामंत्री हिमांशु चौहान, नितिन मलेठा, अंनत आकाश आदि शामिल रहे।
यहां हुआ विरोध, फूंके पुतले
विरोध में सीटू कार्यालय के बाहर, आईटी पार्क के पास, विकासनगर के जुद्दो व्यासी हाइड्रो परियोजना में श्रमिकों ने, लांघा रोड, चाय बागान उड़िया बाग, मसूरी में पुतले फूंके गए।
