Wed. Sep 2nd, 2026

काव्य

डॉ अलका अरोड़ा की श्रृंगार की एक रचना… मन की बातें बतायें तुम्हें क्या

डॉ अलका अरोड़ा प्रोफेसर, देहरादून —————————————— विधा-गीत स्वरचित-श्रृंगार रस की रचना यादे यूँ भी पुरानी चली…

मुंबई महाराष्ट्र से तारा पाठक की एक कविता… उचित है मैं केंचुआ हूँ.. कोशिश भी नहीं की बनूं संपोला

तारा पाठक वर्सोवा मुंबई, महाराष्ट्र ————————————– दूसरों के लिए —————————– उचित है मैं केंचुआ हूँ।…

डॉ अजय सेमल्टी की बहुत कुछ समझाती दो कविताएं…. शंकर माथा पकड़े बैठे.. भागीरथ भी प्यासा है

डॉ अजय सेमल्टी गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल —————————————————- भागीरथ भी प्यासा है…….. शंकर माथा पकड़े…

कवि जसवीर सिंह हलधर की एक ग़ज़ल, खलिहान ही उजड़े मिले, महकी मिलीं सब मंडियां..

जसवीर सिंह ‘हलधर’ देहरादून, उत्तराखंड —————————————- ग़ज़ल (हिंदी) —————————— राही सभी थक कर गिरे, चलती…

कवि जसवीर सिंह हलधर की शानदार ग़ज़ल.. कौम से मौका परस्ती ठीक है क्या सोच ले..

जसवीर सिंह ‘हलधर’ देहरादून, उत्तराखंड ———————————————- ग़ज़ल ( हिंदी) ———————————- कौम से मौका परस्ती ठीक…