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तारा पाठक की बाल कविता… अब कोरोना को मिटा दो.. प्लीज कर दो मेरी विश पूरी।

तारा पाठक
हल्द्वानी, उत्तराखंड
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तन्हाई में चंदा मामा से
मुनिया करती रहती बातें।
लौटा दो फिर से वही
अच्छे दिन अच्छी रातें।

कब झूलेंगे झूला मिलकर
कब खेलेंगे आँख मिचोली ।
बिन सेंनिटाइजर के घर में
आएगी अपनी सहेली।

गुड़िया हो रही मेरी सयानी
कैसे ढूंढूं गुड्डा।
नहीं चाहती मेरी लाडो को
ले जाए कोई बुड्ढा।

अगर सगाई हो भी जाए
कैसे आएंगे अपने।
इस पावन अवसर को
जाने देखे कितने सपने।

कब जाएंगे विद्यालय
कब मिलेंगे सारे सहपाठी ।
कब खिलेंगे चेहरे सबके
छंटेगी कैसे ये उदासी।

अब कोरोना को मिटा दो
प्लीज कर दो मेरी विश पूरी।
हटा दो मास्क चेहरे से
मिटा दो छः फुट की दूरी।

सारे जग में आए खुशहाली
सब पहले के जैसे मुस्काएं।
झूम उठें दे दे ताली सब
प्यारे मामा मिलकर गाएं।

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