कभी करीब से छू न सकी, रोक लेते थे संस्कार
कभी-कभी किसी नामी किताब को पढ़ने से पहले ही उसमें लिखा कोई प्रसंग हमसे भी मिलता-जुलता होता है। जैसे इमरोज जब भी अमृता से मिलता है, पूछता है.. इन दिनों कौन सी किताब पढ़ रही हो ?
‘रसीदी टिकट’ – मैंने कहा ।
सच में, होते हैं ऐसे भी! जो पूछता हो इसी तरह, यही बात -‘क्या पढ़ा पिछले दिनों’ ? रिश्ता हमेशा सच्ची दोस्ती का बना रहता है जब इस वाले इमरोज की अमृता कोई और हो। लेकिन प्यार की अपनी संस्कृति होती है। ये जान-बूझकर किसी से नहीं होता। पता नहीं क्यों मगर ये अचानक ही हो जाता है। अमृता कहती है कि साहिर उसके कमरे में बैठा सिगरेट पे सिगरेट फूंकता था और हमेशा बिना अपने दिल का गुबार निकाले आधी अधजली सिगरेट छोड़कर चला जाता। उसके जाने के बाद उसको याद करती हुई अमृता उन सिगरेट के टुकड़ों को अगुलियों में दाब कर साहिर की अंगुलियों की छुअन महसूस करती। कहा नहीं ना साहिर ने उससे कभी ‘कुछ’.. और इतने पास होते हुए भी वो कभी उसे करीब से छू न सकी। क्योंकि उसके संस्कार उसे रोक लेते थे।
वास्तव में इश्क की अजीब रव़ायत के परे बदन के अपने संस्कार होते हैं , जो हर एक के साथ किसी भी सूरत में खुलने को राजी नहीं होते , चाहे वो उस वक्त में दिल का सबसे खास मेहमान ही क्यों न हो। अमृता की जिदंगी की तरह ही साहिर जैसा ज़हीन शख्स आ सकता है किसी और की जिंदगी में भी।
जिससे बात करना भला लगता हो। लेकिन दुनिया से छुपाये बिना जब बात हो रही है शौक की, पसंद की, आदतों की , दुनियादारी की ! तो दुनिया को उनकी बातों की बातें नहीं बनानी चाहिए।
उन्हें इधर-उधर, यहां-वहां से कुरेदने के बजाय सिर्फ उनका दिल चीर के देखना चाहिए । जिसमें कुछ अश़आर , चंद कसीदे , थोड़ी दिलफरेब बातें और एक-दूसरे को महसूस करने वाली धड़कन शामिल होती है। जाने कैसे उसमें इश्क की पाकीजा खुशबू और गुलाबों की पंखुड़ियों सा कलेवर अपने आप चढ़ जाता है । उसमें किसी और बात की आसक्ति तो हो ही नहीं सकती , वरना ज़ज्बात मैले हो जायेंगे और जिन शब्दों के दम पर वो मरने के बाद भी दुनिया पर राज करते हैं वो उनकी रूह से बाहर निकल ही न पायेंगे। इन एहसासों को फूल, पत्ती, हवा और खुशबू की तरह मन की किताब में बंद रख देना चाहिए , वरना कोई जहरीली हवा जो ये सुहाना मौसम बिगाड़ दे तो
तमाम उम्र दम घुटता रहेगा अपनी नादानियों की रस्सी से।
हां, साहिर को भी ये जानना चाहिए कि अमृता जैसी सच्ची और जादुई महिलाओं की जिंदगी में कोई इमरोज़ पहले से ही मौजूद हो सकता है जो लफ़्जों के मायने शायद थोड़ा कम जाने मगर अमृता की जिन्दगी की तस्वीर में ताउम्र हसीन रंग भरने की कुव्व़त रखता हो।
प्रतिभा की कलम से

