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वाजा इंडिया की गोष्ठी में कवियों ने जमाया रंग

देहरादून, 2 नवम्बर: राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (वाजा इंडिया) की उत्तराखंड इकाई ने शनिवार को इंजीनियर्स एन्क्लेव, जीएमएस रोड, देहरादून में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी का शुभारंभ अदिति बिष्ट ने सरस्वती वंदना से किया। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार सावित्री काला ‘सवि’ ने काव्यपाठ कर मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पढ़ा कि “प्यार न होता यदि जीवन में, जग भी तो नीरस ही लगता।” संचालन राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (वाजा इंडिया) उत्तराखंड महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष डॉ बसंती मठपाल ने किया। उन्होंने पढ़ा कि “ये जीवन कैसा होता है, कभी आँखों में छा जाता है, कभी होठों पर मुस्काता है।”
इस अवसर पर राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (वाजा इंडिया) उत्तराखंड महिला इकाई की सचिव कविता बिष्ट ने “दीप जल उठे आज, आओ देखें द्वार-द्वार, लक्ष्मी मात को नमन, आप कर लीजिए।”
डॉ नीलम प्रभा वर्मा ने “चलो सखी दीपोउत्सव मनाएं, हृदय में स्नेह के दीप जलाएं।” नरेंद्र उनियाल ने “माँ तो कूड़ा नहीं।”, जीके पिपिल ने “तबाही उसकी गुबार में है, तूफान पूरी रफ्तार में है।” डिंम्पल सानन ने “चल पड़ा है दौर देखो, हर घड़ी हँसने-हँसाने का।” अंजू निगम ने “कितना सोचती हूँ बाकी रहूं तुम में मैं।” सविता जोशी ने “कभी भी आ जाना बस वैसे ही, जैसे परिंदे आते हैं आगन में।” निकी पुष्कर ने “मैं सोचती रही, ख्वाब सजते रहे। उम्र ढलती रही, वक्त जाता रहा।” विजयश्री ‘वंदिता’ ने “कुछ लोग यहाँ अनजाने ही जीवन का कथन दे जाते हैं।” सुनाकर वाहवाही लूटी। वहीँ, अदिति बिष्ट ने “हाँ, माना मेरा रंग साफ नहीं पर बेटी हूँ तो तेरी ही।मेरे भी हैं कुछ अरमान बड़े, मत बिखेरो उन्हें ऐसे ही।” सुनाई। गोष्ठी में प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र डंगवाल ‘पार्थ’ जी और महिला इकाई की प्रदेश उपाध्यक्ष हेमलता बहन जी की कमी महसूस की गई।

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