काव्य साहित्य चुनावी चटकारा … वरिष्ठ कवि जीके पिपिल February 20, 2022 Shabdradh जीके पिपिल देहरादून। —————————————————————————————————————————————– कहीं कीचड़ उछल रही है कहीं गड़े मुर्दे उखड़ रहे हैं कहीं गठबंधन बन गए कहीं पुराने रिश्ते बिगड़ रहे हैं क्या मालूम किस करवट बैठेगा ऊँट अब दस मार्च को सुना है कि कुर्सी हथियाने को नए हाथ पकड़ रहे हैं।। Tags: चुनावी चटकारा, वरिष्ठ कवि जीके पिपिल Continue Reading Previous देश के मशहूर कवि/शाइर चेतन आनंद की एक ग़ज़ल … वो मेरे घर तक आकर लौट गयाNext देश के मशहूर कवि/शाइर चेतन आनंद की एक ग़ज़ल … आश्वासन देंगे राहत ऐ पसीने मुस्कुरा More Stories national काव्य साहित्य कवि/गीतकार वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” की ‘समय’ पर एक रचना May 13, 2026 Shabdradh national उत्तराखण्ड साहित्य डॉ. इन्द्रजीत सिंह की पुस्तक ‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का हुआ लोकार्पण May 13, 2026 Shabdradh उत्तराखण्ड देहरादून साहित्य तापस चक्रवर्ती की पुस्तक “हम्पी: उत्कर्ष से अपकर्ष तक” का हुआ लोकार्पण April 5, 2026 Shabdradh Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.