काव्य साहित्य युवा कवि धर्मेन्द्र उनियाल ‘धर्मी’ की एक रचना… हम संघर्षों की हर कहानी भूल गए.. October 30, 2021 admin धर्मेंद्र उनियाल धर्मी अल्मोड़ा, उत्तराखंड ———————————————————————— हम संघर्षों की हर कहानी भूल गए, पहाड़ों का…
काव्य साहित्य कवि/गीतकार वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” के गढ़वाली में दो छंद (मनहरण घनाक्षरी) October 30, 2021 admin वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” देहरादून, उत्तराखंड —————————————————————— मनहरण घनाक्षरी छंद 1- पाड़ देखा रोणु छ यू,…
News Update देहरादून साहित्य उत्तराखण्ड की धार्मिक संस्कृति एवं प्राचीन धर्म स्थलों पर लिखित पुस्तक माँ पीताम्बरा का विमोचन October 29, 2021 admin -मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड की धार्मिक संस्कृति एवं…
साहित्य ग़ज़ल कवि/शाइर जीके पिपिल की एक ग़ज़ल… महबूबा अपनी सलामत रहे उम्र दराज़ हो जाये.. October 29, 2021 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ———————————————————- गज़ल हर लफ़्ज़ इश्क़ में डूबा हुआ अल्फ़ाज़ हो जाये…
काव्य साहित्य ग़ज़ल कवि पागल फकीरा की एक रचना… बसंत के मौसम का अहसास है मुझे.. October 29, 2021 admin पागल फकीरा भावनगर, गुजरात ————————————————– बसंत के मौसम का अहसास है मुझे। याद हमारा पहला…
काव्य साहित्य युवा कवि धर्मेंद्र उनियाल ‘धर्मी’ की रचना… सब के प्राण बचाती ख़ाकी October 25, 2021 admin धर्मेंद्र उनियाल ‘धर्मी’ देहरादून, उत्तराखंड ——————————————————————– सबके प्राण बचाती ख़ाकी, सबके काम है आती ख़ाकी।…
काव्य साहित्य करवाचौथ पर कवि/गीतकार वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” के प्रेम पर कुछ माहिया October 24, 2021 admin वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” देहरादून, उत्तराखंड —————————————————————– माहिया 1- मनभावन पुरवाई मन में आस जगी कि,…
काव्य साहित्य सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली’ की एक गढ़वाली रचना…. चिट्ठी October 23, 2021 admin सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली’ देहरादून, उत्तराखंड चिट्ठी कलेजी म ठंड मेरी यखी पड़ी जांदी जु चिट्ठी…
काव्य साहित्य जगदीश ग्रामीण ‘दर्द-ए-दिल’ का चुनावी मंडाण October 21, 2021 admin जगदीश ग्रामीण ‘दर्द-ए-दिल’ उत्तराखंड ———————————— चुनावी मंडाण सावन सदा प्यासा रहे जहां पगडंडियों के पंथ…
साहित्य ग़ज़ल कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… बस्ती उजाड कर लोग गाँव ढूंढ रहे हैं.. October 20, 2021 admin पागल फकीरा भावनगर, गुजरात ———————————————————— ग़ज़ल बस्ती उजाड कर लोग गाँव ढूंढ रहे हैं, कुल्हाड़ी…