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कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… बस्ती उजाड कर लोग गाँव ढूंढ रहे हैं..

पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात


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ग़ज़ल

बस्ती उजाड कर लोग गाँव ढूंढ रहे हैं,
कुल्हाड़ी ले कर लोग छाँव ढूंढ रहे हैं।

चैन-ओ-सुकूं को दांव पर लगा कर,
ज़िन्दगी में भी लोग तनाव ढूंढ रहे हैं।

परिवर्तन की पराकाष्टा पर पहुँच कर,
इन्सान आबोहवा में बदलाव ढूंढ रहे हैं।

सरोवर और समन्दर में बस्ती बसा कर,
लोग सूखे तालाब में भी नाँव ढूंढ रहे हैं।

हैवानियत का माहौल बन चुका है फ़क़ीरा,
लोग गला काट कर हाथ-पाँव ढूंढ रहे हैं।

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