काव्य साहित्य चुनावी चटकारा … वरिष्ठ कवि जीके पिपिल February 6, 2022 Shabdradh जीके पिपिल देहरादून। ——————————————————————————————– वो ख़ुद को सच्चा और विपक्षियों को झूँठा बता रहा है ख़ुद टूटा है अंदर तक और आईने को टूटा बता रहा है ग़लती उसकी नहीं चुनावी भिड़ंत की ही दरकार होगी जो दिल का काला होकर गोरों को कलूटा बता रहा है।। Tags: चुनावी चटकारा, वरिष्ठ कवि जीके पिपिल Continue Reading Previous वसंत पर विशेष: कवि वीरेंद्र डंगवाल “पार्थ” … धरती धवल हुई, उमंगें नवल हुईNext चुनावी चटकारा … वरिष्ठ कवि जीके पिपिल More Stories उत्तराखण्ड देहरादून साहित्य पाठकों का बड़ा प्रतिशत खोया, अब इसे बचाए रखना बड़ी चुनौती: जितेन ठाकुर August 18, 2026 Shabdradh national काव्य साहित्य कवि/गीतकार वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” की ‘समय’ पर एक रचना May 13, 2026 Shabdradh national उत्तराखण्ड साहित्य डॉ. इन्द्रजीत सिंह की पुस्तक ‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का हुआ लोकार्पण May 13, 2026 Shabdradh Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.