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गणतंत्र दिवस पर कवि जसवीर सिंह हलधर की शानदार रचना

जसवीर सिंह ‘हलधर’

देहरादून, उत्तराखंड
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गीत — गणतंत्र दिवस
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महानता ज़हान को दिखा रही है भारती।
विज्ञान संग वेद भी सिखा रही है भारती।।

कहीं पुकार धर्म की कहीं पुकार कर्म की।
महीन चोट मर्म की, सरीन ओट शर्म की।
जमीन चाँद चांदनी नवीन राग रागनी,
विशाल रूप धार मुस्करा रही है भारती।
महानता ज़हान को दिखा रही है भारती।।1

उड़ा जहाज व्योम में मशीन बोलती हुई।
जहाज की दहाड़ से जमीन डोलती हुई।
उड़ान आसमान की महान देश यान की,
प्रवीन गीत जीत के सुना रही है भारती ।
महानता ज़हान को दिखा रही है भारती।।2

सड़ी सड़ी कुरीति नीति आग झोंक दे रही।
अड़ी पड़ी अनीति प्रीत राग रोक दे रही।
दिशा दिगंत लाल है जली नई मसाल है,
मज़ा कमीन चीन को चखा रही है भारती।
महानता ज़हान को दिखा रही है भारती।।3

विशाल देव लोक को महीन तोलती हुई।
खगोल के प्रलोक का रहस्य खोलती हुई।
महान ध्यान योग से बचे शरीर रोग से,
दवा वबा को रोकने बना रही है भारती ।
महानता ज़हान को दिखा रही है भारती।।4
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सर्वाधिकार सुरक्षित।
प्रकाशित…..26/01/2021
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