युवा कवि अमित नैथानी मिट्ठू की एक रचना… बस राजी-ख़ुशी भेजणु छौं माँ
अमित नैथानी ‘मिट्ठू’
ऋषिकेश, उत्तराखंड
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फौजी साब कु खत …
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तेरा हाथकी रोट्टी खयां मी बिज्याम दिन ह्वेगेनी माँ,
बिखौती तक घौर औलू अब ज्यादा दिन नि रैगेनी माँ।
खुद त मी भी लगदी पर पैली देश सेवा च मां,
तुम सब्युं की फोटो देखिकी अफी-अफ बुथ्याणु रैन्दो माँ।।
फिकर त्वे भी होंदी होली,
इतगा त मी भी जणदू छौं माँ।
पर तू मेरी बिल्कुल फिकर न करी,
तेरा आशिर्वादन मी राजी-ख़ुशी छौं माँ।।
रात कटण मुश्किल ह्वेजांदी ,
सरी रात मी नींद नि आंदी माँ।
काश तू होंदी मी दगडी त,
तेरी खुकली मा मुण्ड रखी से जांदु माँ।।
दगडा का सिपै तेरी फोटो देखिक ,
त्वेकू सेवा-सौंली बोना छा माँ ।
तेरा दियाँ अखोड-बुखणों खैकी ,
भरी खुश होणा छा माँ।।
बरफिला डाँडा मा ड्यूटी करी,
मेरा हाथ खुट्टा आले जन्दिन माँ।
जै दिन तेरी खुद लगदी ,
मेरा आँखा भुरेजन्दिन माँ।।
ऐंसू हाथ पर न रखडी पैरी ,
न देखी मिन बग्वाली माँ।
पर मेरी बॉर्डर की ड्यूटी तै तू
मेरा भागा की खैरी न समझी माँ।।
अच्छा अब मी सेणु छौं ,
रात भी ज्यादा ह्वेगी माँ।
त्वेकु मेरी चिट्ठी मिल जाली त ,
तू भी अफरी राजी-ख़ुशी लिखी भेजी माँ।।
फोन मा सिग्नल होंदा त मी त्वेकु रोज फोन करदू माँ।
चिट्ठी का सारा त्वेमा अफरी राजी-ख़ुशी भेजणु छौं मां।।
बस राजी-ख़ुशी भेजणु छौं माँ।।
©®- अमित नैथानी ‘मिट्ठू’
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सर्वाधिकार सुरक्षित।
प्रकाशित…..26/01/2021
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