कवियित्री तारा पाठक की रचना… हमर नौं साल चैत में आल
तारा पाठक
वर्सोवा, मुंबई, महाराष्ट्र
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हमर नौं साल चैत में आल
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तुम बधाइ देला,
हैप्पी न्यू इयर मैं लै कै द्यूंल।
तुम केक काटला
ए टुकुड़ मैं लै खै ल्ह्यूंल।
तुम बार बाजी जालै उठि रौला,
पटाक फोड़ला,
उ हाल्ल गुल्ल में मैंजै कसी सितुंल।
लेकिन तुम भोव न्यू इयर
मनाला मनया, मैं नि मनूं।
किलैकि जदिन बटी –
बोट डाव पङुरण भैटाल।
नाजा ग्याड़ हंङुरण भैटाल।
आफी आफी फूल हँसाल।
डाइ बोट्यों में चाड़ बासाल ।
दसों दिश उज्यावपट्ट होल।
बसंत मातियल, हँसि ठट्ठ होलि।
मन में नई उमंग होलि।
पिरकिरती हमरि संग होलि।
जब नई नई ऐसास ह्वाल।
दिन रात सुबास ह्वाल।
नई पातड़, नई छंबच्छर होल।
नई शाकाल, नौर्तों सुऔसर होल।
घर घर पु बाड़ पकाल।
तब होल हमर नई साल।
तबै मैं लै मनूंल आपणि रीत।
तबै गाई जाल -नौं साला गीत।।
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शब्दार्थ–
नौं-नया
आल-आएगा
टुकुड़-टुकड़ा
खै ल्ह्यूंल-खा लुंगी
मैं जै-मैं जो
सितुंल-सोउंगी
भोव-आने वाला कल
जदिन बटी-जिस दिन से
पङुरण-पत्ते आना
हंङुरण-अंकुरण
चाड़ बासाल-चिड़ियाँ चहकेंगी
मातियल-बौराएगा
पिरकिरती-प्रकृति
पातड़-पत्रा
छंबच्छर-संवत्सर
नौर्तों-नवरात्रि
सुऔसर-सुअवसर
पकाल-पकाऐंगे
मनूंल-मनाउंगी
