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कवि डॉ ब्रम्हानन्द तिवारी ‘अबधूत’ की राग यमन कल्याण पर आधारित एक रचना

डॉ ब्रम्हानन्द तिवारी ‘अबधूत’
मैनपुरी, उत्तर प्रदेश
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राग यमन कल्याण पर आधारित
माँ सरस्वती वन्दना
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भारती माँ विनय बारम्बार है।
आ गया सेवक तुम्हारे द्वार है।।

ज्ञान का भण्डार हो माँ शारदे,
अपने कवि पुत्रों को ह्रदय दुलार दे
तन मन निछावर आज माँ तेरे द्वार है
भारती माँ विनय बारम्बार है।
आगया सेवक तुम्हारे द्वार है।।

ऋषियों, मुनियों ने तुम्हें पूजा सदा,
देव सब तुम को पुकारें सर्वदा,
हँस वाहिनी माँ करो उद्धार है।।
आ गया सेवक तुम्हारे द्वार है।।

बुद्धि, विद्या, माँ तुम्हीं से पा गया,
अब तो ब्रम्हानन्द शरण में आ गया,
सारी दुनियाँ से बड़ा तेरा द्वार है।।
भारतीं माँ विनय बारम्बार है।।

वेद जननी माँ तुम्हारा नाम है,
हर ह्रदय में माँ तुम्हारा धाम है।
सँसार में सबसे बड़ा दरबार है।।
आज्ञा सेवक तुम्हारे द्वार है।।
भारती माँ विनय बारम्बार है।

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