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युवा कवि विनय अन्थवाल की एक रचना… काश आज माँ होती

विनय अन्थवाल
देहरादून, उत्तराखंड
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काश आज माँ होती
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काश आज माँ होती
तो दुनिया मेरी हसीन होती
ख़ुशनसीब होता मैं भी जहान में
ये दुनिया मेरी रंगीन होती ।

काश आज माँ होती।
विमाता न मेरी आज होती।
बेवजह न मुझपर इल्जाम लगते
माँ की दुवाएँ जो मेरे साथ होती ।

काश आज माँ होती।
बेदाग छवि मेरी ये रहती।
न शत्रु होता मैं भी किसी का
विमाता की आँखों का काँटा न होता।

काश आज माँ होती।
प्रशंसा मेरी भी दिन-रात होती।
मेरे मन के भावों को वो जान लेती
विमाता की तरह न इल्जाम लगाती ।

काश आज माँ होती।
मेरे मासूम मन को वो जान जाती।
सुपुत्र होता मैं भी जहान में
मेरी माँ जो आज मेरे पास होती।

काश आज माँ होती।
ये उदार मन न व्यथित होता
प्रेम से सींचा हुआ मन
संसार से विरक्त न होता।

काश आज माँ होती।
मैं भी यहाँ ख़ुशनसीब होता।
ममता में उसके हरपल रहता
मैं भी जहान में ख़ुशनसीब होता।।

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