सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली’… लघु कथा… जन्मदिन
सुलोचना परमार उत्तरांचली
देहरादून, उत्तराखंड

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जन्मदिन
समृद्धि अपनी दादी को समझा रही थी, रोओ मत दादी। ताऊ जी ठीक हो जाएंगे। ऑपरेशन सफल हो जाएगा। बस आप रोओ मत।
मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा
पर क्या करूँ?
आप कल से भूखी प्यासी हैं, पापा जी गए हैं वहाँ आप घबराओ नहीं। इतने में मोबाइल की मधुर सी आवाज आई तो समृद्धि ने दौड़ कर मोबाइल उठाया।पापा से बात करने के बाद उसने मोबाइल दादी को दिया और कहा बात कीजिये ।
उधर से छोटे बेटे की आवाज़ आई माँ आपको जन्मदिन की बधाई ।बहुत सुंदर तोहफ़ा भेज रहा हूँ इससे अच्छा तोहफा हो ही नहीं सकता था और उसने बड़े बेटे की ऑपरेशन के बाद उसकी फोटो भेजी।
ऑपरेशन सफल रहा माँ, कल तो डॉ. भी घबरा रहे थे
शायद आपकी प्रार्थना ईश्वर ने सुन ली। तसल्ली से देख लो भाई को। दादी की आंखों से आंसू बहते देख पोती धीरज बंधाने लगी। दादी से कहा में अभी आ रही हूं दादी।
दादी भी अपने काम में लग गई। धीरे-धीरे कुछ आस बंध गई थी बेटे की जिंदा रहने की
शाम को समृद्धि केक लेकर आ गई। दादी ताऊ जी ठीक हो जाएंगे। आप का जन्म दिन तो मनाएंगे। आप और में है तो सही। बस साधारण से जन्मदिन को समृद्धि ने खास बना दिया ।
वो बारह दिसम्बर यादों के पन्नों में है उनके।
