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किसान आंदोलन पर कवि हलधर की शानदार रचना

जसवीर सिंह हलधर
देहरादून, उत्तराखंड
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जागरण गीत -जागो किसान
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हमारे भोजन अन्न दाता, सुनो गिरधारी के भ्राता।
नहीं बहकावे में आना, पड़ेगा सबको पछताना।।

किसानी पूरे भारत की, बने क्यों सिक्ख यहां मुख्तार।
कनाडा से आये सरदार, पहन पीली पीली दस्तार ।।
लिखा ट्रेक्टर पे खलिस्तान, किया है भारत का अपमान,
दिखाकर ए-के छप्पन वो, चाहते हमको धमकाना।।
नहीं बहकावे में आना, नहीं बहकावे में आना।।1

सुनो दिल्ली के मुखिया ने, रखा है एक दिवस उपवास।
उधर राजा अमरिंदर से, करी है ट्विटर पे बकवास।।
इरादों को भी पहचानो, सही को तथ्य सहित मानो,
घुसे शाहीन बाग वाले, लिए अलगावी परवाना।।
नहीं बहकावे में आना, नहीं बहकावे में आना।।2

बने हैं धरने पर नेता, करोड़ों की गाड़ी वाले।
फटे ना पैर कभी जिनके, पड़े ना हाथों में छाले।।
अकेले जाट पड़े ले खाट, नहीं हैं साथ दूसरी जात,
बुना है जाल आढ़ती का, पुराना जाना पहचाना।।
नहीं बहकावे में आना, नहीं बहकावे में आना।।3

अभी परखो जानो कानून, करो मत संशय सोच विचार।
सुधारों पर राजी सरकार, बढ़ाओ मत इतनी तकरार।।
किये जो साठ साल तक राज, नहीं भाया उनको यह काज,
विधेयक से होगा उद्धार, लिखा “हलधर” ने यह गाना।।
नहीं बहकावे में आना, पड़ेगा सबको पछताना।।4
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सर्वाधिकार सुरक्षित।
प्रकाशित…..15/12/2020
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