Wed. Jun 3rd, 2026

कवि जसवीर सिंह हलधर का शानदार जीत.. लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को..

जसवीर सिंह हलधर

देहरादून, उत्तराखंड

—————————————-

कविता-भारत चीन सीमा विवाद

———————————————–

सीमा पर पकड़ बनाने को, भारत को अकड़ दिखाने को।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।

खिंच गया माथ संशय लेखा, टूटी अतिक्रमण की रेखा।
अपनी सीमा की रक्षा में, लद्दाखी दिखे प्रतीक्षा में।
भारत की संसद दिखी विकल, सैना भारत की गयी संभल।
ड्रैगन तन कर के खड़ा हुआ, दादा बन कर के अड़ा हुआ।
भारत की सैना पहुँच गयी, ड्रैगन को सबक सिखाने को।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।1

लकिन वो जिद कर बैठा था, उल्टा भारत पर ऐठा था।
सेनायें सम्मुख आयी थी, आपस में हाथा पायी थी।
लड़ने को वो तैयार खड़ी, रण चंडी पैर पसार खड़ी।
डोभाल बीजिंग को धाये, जिंगपिंग को समझा के आये।
बोले शांति का दूत मान, आया विध्वंश बचाने को।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।2

अपना पूरा रुख जता दिया, सीधे शब्दों में बता दिया।
भारत ना बासठ वाला है, अब तेरे लिये उठाला है।
भारत की टीस बढ़ायेगा, टुकड़े टुकड़े हो जायेगा।
यदि मर्यादा तू तोड़ेगा, अपनी ही किस्मत फोड़ेगा।
मैं बुद्ध भूमि से आया हूँ, तेरा मन शुद्ध कराने को।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।3

भारत ना रुकने वाला है, सम्मुख ना झुकने वाला है।
ना बुद्ध क्षेत्र ले पायेगा,अक्साई भी दे जायेगा।
ना चल असाध्य को साधन तू, ना चल भारत को बांधन तू।
हम बुद्ध भाव सौदाई हैं, तू बुद्ध धर्म अनुयायी है।
मैं बात बनाने ना आया, आया औकात दिखाने को।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।4

हमने दुनियां को बुद्ध दिये, महाभारत जैसे युद्ध दिये।
तू रख अपनी धरती तमाम, हम नहीं चाहते एक ग्राम।
यदि बात समझ में ना आयी, तो रोयेंगी चीनी मायी।
बोटी बोटी कट जाएंगे, हम इंच नहीं हट पायेंगे।
बच्चा बच्चा तैयार खड़ा, भारत माँ पर मिट जाने को ।
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।5

जल सैना ताकत जानी नहीं, थल सेना आफत जानी नहीं!
जाटों का हमला देखा नहीं, सिक्खों का अमला देखा नहीं!
गढवाली देखे ना लड़ते, रण चंडी खप्पर ले चढ़ते!
तू मर्द मराठे देख जरा, यदुवंशी पटठे देख जरा!
गुरखों का टोला आता है, चंडी पर भेंट चढ़ाने को!
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।6

तूने भारत को जाना ना, तू सही सही पहचाना ना!
राणा के वंशज देख खड़े, अकबर के अंशज देख खड़े!
घट घट में राम की वर्षा है, हर परशुराम कर फरसा है!
वो धरा लाल हो जाएगी, कल का सवाल हो जाएगी!
पूरी दुनियाँ हमें कोसेगी, चीनी की जाति मिटाने को!
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।7

ये इतना भीषण रण होगा, दोनों के लिये क्षरण होगा!
धरती अंबर सब डोलेंगे, शिव नेत्र तीसरा खोलेंगे!
जब मान सरोवर में शंकर, फूटेंगे हो कंकर कंकर!
धरती पानी पानी होगी, तेरी ज्यादा हानी होगी!
भारत की ताकत का तुझको, आया अंदाज कराने को!
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।8

हुंकार तू सुन ले रघुपति की, फुँकार तू सुन ले नगपति की!
जापान लड़ेगा भारत संग, दक्षिण कोरिया भी करे जंग!
तेरी गति वापस मोडन को, वाडेन खड़ा मुँह तोड़न को!
न चिन्न तेरा बच पायेगा, तू छिन्न भिन्न हो जाएगा!
वंशज हूँ विश्व गुरु का मैं, आया हूँ पाठ पढाने को!
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।9

गलवान नदी संघर्ष देख, भरत माता उत्कर्ष देख!
कुछ हासिल ना कर पाएगा, व्यापार ठप्प हो जाएगा!
दोनों की जनसंख्या भारी, दोनों की बड़ी ज़िम्मेदारी!
ये धरा हरी सिंह नलवा की, कविता है “हलधर “जसुवा की!
सब देश ताक में बैठे हैं, हम दोनों के भिड़ जाने को!
लद्दाख क्षेत्र की सरहद पर, आया क्यों हमें डराने को।।10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *