Wed. Jun 3rd, 2026

चुनावी चटकारा … वरिष्ठ कवि जीके पिपिल

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड

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कभी अपने ऊपर तो कभी दल पर विश्वास करता है
वो विधायक़ी पाने को एक ज़मीन आकाश करता है
थोड़ा पाने के लिये दाव पर सभी कुछ लगा दिया है
हारने का डर सताता है तो जीतने की आस करता है

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