Wed. Sep 9th, 2026

चुनावी चटकारा … वरिष्ठ कवि जीके पिपिल

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड।

—————————————————————–

आँधी नहीं इस दफ़ा चुनावी बयार बह रही है
कुंद ही हुई है अपनी धार तलवार कह रही है
कहीं डल रहीं हैं बुनियादें नये-नये भवनों की
किसी किसी क्षेत्र में पुरानी मीनार ढह रही है

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *