Wed. Jun 3rd, 2026

पागल फकीरा की एक रचना… ज़िन्दगी से भी जाने दो ना जो तुमको छोड़ गई

पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात


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ज़िन्दगी से भी जाने दो ना जो तुमको छोड़ गई,
दिल से उसे निकाल दो जो तुमसे नाता तोड़ गई।

यादों में जीने का क्या फ़ायदा जो तुम्हारी नहीं,
तुम रस्म-ओ-रिवाज के लिए ग़म से जोड़ गई।

उसके इन्तज़ार में क्यूँ ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे हो,
जो हाथ पकड़ा था उसने वही हाथ वो मरोड़ गई।

भरी महफ़िल में मुझको जलाने के लिये वो ख़ुद,
आज सरेआम किसी ग़ैर की बाहों को ओढ़ गई।

जिसको जाना है, उसे कोई रोक न पाया है यहाँ,
“फ़क़ीरा” याद को भी भूल जा जो मुँह मोड़ गई।

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