Wed. Aug 5th, 2026

कृष्ण जन्माष्टमी पर कवि जगदीश ग्रामीण की कान्हा को समर्पित एक रचना

जगदीश ग्रामीण
देहरादून,उत्तराखंड


—————————————–

वाह रे कान्हा!
———————-

कान्हा तेरा वो माखन चुराना
गली गली मुरली तान सुनाना
गोपी ग्वालों संग गाय चराना
आज भी मदहोश कर जाता है।

मथुरा जेल में तेरा जन्म लेना
कंस के कपट को चुनौती देना
रण में गीता ज्ञान सुना जाना
आज भी दीवाना कर जाता है।

गोपियों संग नित रास रचाना
द्वारिका नगरी नई बसा जाना
विप्र सुदामा से मीत निभाना
आज भी हर्षित कर जाता है।

देवकी का दर्द मिटा जाना
यशोदा का मान बढ़ा जाना
धर्मार्थ कुरुक्षेत्र सजा जाना
आज भी गर्वित कर जाता है।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *