Sat. Apr 18th, 2026

कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… किसी ने पुकारा नाम मेरा डर रहा हूँ मैं…

पागल फकीरा
भावनगर, गुजरात


——————————————-

किसी ने पुकारा नाम मेरा डर रहा हूँ मैं,
सुन कर आहट मौत की मर रहा हूँ मैं।

फूल को मसलने वाले बागबान को देख,
रात भर आँखों में आँसू भर रहा हूँ मैं।

बागबान ने उजाडा था ख़ुद चमन अपना,
तब से इसी ख़्याल में बिख़र रहा हूँ मैं।

ऐसे ज़ालिम बाग़बान होते हैं इस जहां में,
ऐसी भयानक बातों से बेख़बर रहा हूँ मैं।

“फ़क़ीरा” ख़ुद अपना अंजाम सोचे बिना,
वहशी दरिंदों से मुक़ाबला कर रहा हूँ मैं।

1 thought on “कवि पागल फकीरा की एक ग़ज़ल… किसी ने पुकारा नाम मेरा डर रहा हूँ मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *